26वें दिन भी हड़ताल जारी: NHM कर्मचारियों ने माँ काली और श्री बालाजी के चरणों में रखी 10 मांगें, मांगी सद्बुद्धि

जशपुर – छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी पिछले 26 दिनों से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांग विगत 20 वर्षों से लंबित नियमितीकरण है। हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी हो गई है, जिससे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
हड़ताल के 26वें दिन, एनएचएम कर्मचारियों ने जशपुर में अपनी मांगों की पूर्ति के लिए एक अनोखी मनोकामना यात्रा निकाली। उन्होंने धरनास्थल से नगर के प्रसिद्ध और सिद्ध शक्ति स्थल माँ काली मंदिर तक पैदल चलकर यात्रा की। कर्मचारियों ने पीले कागज़ पर अपनी मांगें लिखकर माँ काली और श्री बालाजी के चरणों में अर्पित की, और प्रार्थना की कि सरकार को सद्बुद्धि मिले ताकि वे उनके हित में फैसला ले सकें और स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर से सुचारू रूप से चल सकें।
मांगों और वादों की बारात
कर्मचारियों ने अपनी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक और अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने “मांग और वादों की बारात” निकाली, जिसमें लगभग 815 कर्मचारी शामिल थे। इस बारात का उद्देश्य सरकार के बड़े नेताओं और मंत्रियों को उनके द्वारा सत्ता में आने से पहले किए गए वादे याद दिलाना था।
एनएचएम संघ जशपुर के अनुसार, ये वादे “मोदी की गारंटी” का हिस्सा थे, जिनमें संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, संविलयन, ग्रेड पे, अनुकंपा नियुक्ति, और स्वास्थ्य बीमा जैसी 10 प्रमुख मांगें शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के अड़ियल रवैये के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस हड़ताल का सीधा असर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ रहा है, और प्रशिक्षित व कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी भी अपनी मांगों के पूरा होने का इंतज़ार कर रहे हैं।





