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जूस बेचने से लेकर हजारों करोड़ का साम्राज्य और ₹200 करोड़ की दुबई वाली शादी… फर्जी पासपोर्ट के सहारे ओमान में घुसता दबोचा गया महादेव ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर

हजारों करोड़ रुपये के ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप’ घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। अब तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षित पनाहगाह में ऐश-ओ-आराम की जिंदगी काट रहे चंद्राकर को रॉयल ओमान पुलिस ने मस्कट में गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार वह अपनी असली पहचान छिपाकर, एक फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में घुसने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल उसे मस्कट के बेहद सुरक्षित ‘अल खौद डिटेंशन सेंटर’ में रखा गया है।

इंटरपोल ने तोड़ा ‘राजनैतिक शिकार’ का मुखौटा

सौरभ चंद्राकर ने कानून से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चालें चली थीं। उसने इंटरपोल की फाइल्स कंट्रोल करने वाली विशेष विंग (CCF) के सामने गुहार लगाई थी कि भारत में उसके खिलाफ हो रही कार्रवाई ‘राजनैतिक’ है और उसे निष्पक्ष न्याय नहीं मिलेगा। लेकिन इंटरपोल ने उसकी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया कि यह मामला राजनैतिक नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और भारी-भरकम वित्तीय अपराध का है। रेड नोटिस बरकरार रहने के कारण ही ओमान पुलिस ने उसे दबोच लिया।

बैकग्राउंड: जूस बेचने वाले से ‘सट्टा किंग’ बनने की कहानी

सौरभ चंद्राकर का इतिहास छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई से जुड़ा है। कभी बेहद सामान्य स्तर पर जूस की दुकान चलाने वाले सौरभ ने सट्टे की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते ‘महादेव ऐप’ के जरिए एक ऐसा अवैध डिजिटल साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसने भारत के लाखों युवाओं को कंगाल बना दिया।

चर्चा में आई थी ₹200 करोड़ की शादी:

सौरभ चंद्राकर पहली बार केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) के रडार पर तब सबसे प्रमुखता से आया, जब फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में उसकी शादी हुई। इस शादी में पानी की तरह ₹200 करोड़ बहाए गए थे। मेहमानों को लाने के लिए प्राइवेट जेट बुक किए गए थे और बॉलीवुड के कई बड़े सितारों को परफॉर्म करने के लिए करोड़ों रुपये दिए गए थे। इसी भव्यता ने भारत की खुफिया एजेंसियों को चौंकाया और जांच का दायरा तेज हुआ।

प्रत्यर्पण की तैयारी: अब भारत लाने की बारी

सौरभ ने मस्कट में वकीलों की बड़ी फौज तो खड़ी कर ली है, लेकिन फर्जी पासपोर्ट और अवैध प्रवेश के संगीन मामले के कारण उसे ओमान में जमानत मिलना नामुमकिन माना जा रहा है। इधर नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियां पूरी सक्रियता से जुट गई हैं। ओमान सरकार के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण (Extradition) के दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं ताकि चंद्राकर को जल्द से जल्द भारत लाकर छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में दर्ज मुकदमों का सामना कराया जा सके।
महादेव ऐप के इस सह-प्रमोटर की गिरफ्तारी को भारत सरकार और वित्तीय जांच एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता माना जा रहा है।

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