सरपंच की दबंगई: गाढ़ी कमाई से खरीदी 5 एकड़ जमीन पर जबरन कब्जा, विरोध करने पर बुजुर्ग को हाथ-पैर तोड़ने की धमकी

लखनपुर । सत्ता और पद की हनक किस कदर आम जनता पर भारी पड़ती है, इसका एक ताजा मामला लखनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम माजा से सामने आया है। यहां के वर्तमान सरपंच खेमराज सिंह पर अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर ग्रामीणों की निजी और क्रय की गई भूमि पर जबरन कब्जा करने और खेती करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सरपंच की इस कथित दबंगई से पूरे क्षेत्र के ग्रामीण खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
36 साल पहले खरीदी जमीन, अब ‘रसूख’ के आगे बेबस बुजुर्ग
पीड़ित रामचंद्र सिंह (उम्र लगभग 60 वर्ष, निवासी ग्राम अंधला) ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि साल 1989-90 में उन्होंने ग्राम माजा में पाई-पाई जोड़कर 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि खरीदी थी। लेकिन आज वही जमीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई है। रामचंद्र सिंह का आरोप है कि ग्राम माजा के सरपंच खेमराज सिंह अपने पद और राजनैतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर उनकी खरीदी हुई जमीन पर जबरन कब्जा कर खेती कर रहे हैं।
जब पीड़ित बुजुर्ग और उनके बेटे अवधेश सिंह ने इसका विरोध किया, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय सीधे तौर पर हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने काटा ‘फैना’, तहसील के चक्कर काट रहा पीड़ित परिवार
हताश और डरा हुआ पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर लखनपुर थाने पहुंचा था। लेकिन वहां भी उन्हें त्वरित राहत नहीं मिली। पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप करने के बजाय ‘फैना’ (शमनीय अपराध की रिपोर्ट/शांति भंग की धारा) काटकर मामला तहसील न्यायालय भेज दिया। अब पीड़ित बुजुर्ग अपनी ही खरीदी हुई जमीन को वापस पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है और शासन-प्रशासन से न्याय की भीख मांग रहा है।
क्या है सरपंच खेमराज सिंह का पक्ष?
इस पूरे मामले में जब आरोपी सरपंच खेमराज सिंह से पक्ष लिया गया, तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरपंच का कहना है:
“पूर्व में हमारे पिताजी बिग़न राम के द्वारा सभी के नाम पर जमीन खरीदी गई थी। वर्तमान में यह जमीन भले ही कागजों पर रामचंद्र सिंह के नाम दर्ज है, लेकिन साल 1998 से ही इस जमीन पर हमारा कब्जा है। हमने केवल कुछ हिस्से पर खेती की है, बाकी 4 एकड़ जमीन छोड़ दी है। हमारी तरफ से कोई धमकी नहीं दी गई है।”
सरपंच के इस बयान ने ही विवाद को और हवा दे दी है। जब सरपंच खुद मान रहे हैं कि जमीन आधिकारिक तौर पर रामचंद्र सिंह के नाम दर्ज है तो फिर 1998 से उस पर जबरन काबिज रहना कानूनन कितना सही है? क्या रसूखदार जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर हैं? पीड़ित परिवार अब टकटकी लगाए प्रशासन की ओर देख रहा है कि कब उन्हें भू-माफियाओं और दबंगई से मुक्ति मिलेगी।





