दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भारी बारिश के बाद आज देर शाम उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग पहुंचेगा डिप्रेशन,30 अक्टूबर को भी भारी बारिश के आसार


अंबिकापुर । भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर बने डिप्रेशन (चक्रवात “अर्नब” के अवशेष) के प्रभाव से पूरे प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हो चुकी हैं। मौसम विभाग के स्पष्ट आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव जैसे संभाग के जिलों में व्यापक बारिश का दौर जारी है। यह चक्रवाती प्रणाली आज 29 अक्टूबर 2026 की शाम से देर शाम तक उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों यानी सरगुजा संभाग तक पहुंचेगी, जिसके चलते प्रदेश के दक्षिण से लेकर उत्तर छोर तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और अचानक बाढ़ की गंभीर स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार, तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौजूद भीषण चक्रवाती तूफान “अर्नब” कमजोर होकर चक्रवाती तूफान, फिर डीप डिप्रेशन और आज 29 अक्टूबर को सुबह 05:30 बजे डिप्रेशन में तब्दील हो गया। आज सुबह 08:30 बजे यह डिप्रेशन जगदलपुर से लगभग 40 किमी उत्तर-उत्तरपश्चिम, टिटलागढ़ से 180 किमी दक्षिण-पश्चिम और रायपुर से 200 किमी दक्षिण में स्थित था। पिछले 6 घंटों के दौरान यह लगभग 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर दिशा की ओर बढ़ा है। इसके लगातार उत्तर दिशा में आगे बढ़ते हुए आज 29 अक्टूबर की शाम अथवा देर शाम तक उत्तरी छत्तीसगढ़ तथा उससे सटे उत्तर-पश्चिमी ओडिशा के ऊपर एक स्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र में कमजोर होकर केंद्रित होने की पूरी संभावना है।
इस प्रणाली के प्रभाव से आज 29 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के जिलों (सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, बस्तर) में तथा शाम के बाद उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के जिलों (सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, जशपुर) एवं रायगढ़ जिले में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश और कई स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। प्रदेश में 29 से 31 अक्टूबर के दौरान अधिकांश स्थानों पर व्यापक वर्षा का दौर बना रहेगा। इसके बाद 30 और 31 अक्टूबर को आंधी-तूफान व बिजली कड़कने की गतिविधियां जारी रहेंगी, जबकि 1 और 2 नवंबर को भी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग ने चक्रवाती प्रभाव के कारण तेज हवाओं की भी चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ के सुदूर दक्षिणी जिलों (सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर) में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो झोंकों के साथ 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। वहीं आज 29 अक्टूबर को राज्य के विभिन्न हिस्सों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की गति से आंधी चलने और हवा के झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने के आसार हैं। लगातार भारी बारिश और संतृप्त मिट्टी के कारण 30 अक्टूबर की सुबह तक प्रदेश के 13 प्रमुख जिलों मुंगेली, मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर, सक्ती, महासमुंद, कोरिया, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, रायगढ़, कोरबा और बलरामपुर में अचानक बाढ़ (Flash Flood) और निचले इलाकों में जलभराव का मध्यम से उच्च खतरा घोषित किया गया है।
मौसम की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और प्रशासन ने किसानों तथा आम नागरिकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खड़ी फसलों और सब्जियों के खेतों में जलजमाव रोकने के लिए पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें तथा कटी हुई उपज को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाएं या तिरपाल से ढकें। इसके अलावा ठंड की सब्जियों और रबी फसलों की नई बुआई व रोपाई को फिलहाल टालने का परामर्श दिया गया है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे आकाशीय बिजली और बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें, बिजली के उपकरणों को अनप्लग रखें और जलभराव वाले क्षेत्रों तथा नदियों-नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।



