अम्बिकापुर

सरकारी स्कूल का प्रधान पाठक हत्या के प्रयास के मामले में दोषी सिद्ध , जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा ने किया बर्खास्त

अम्बिकापुर / जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार विकासखण्ड उदयपुर के शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के विरुद्ध थाना मणिपुर में पंजीबद्ध अपराध में माननीय पंचम अपर सत्र न्यायाधीश अम्बिकापुर द्वारा पारित निर्णय के तहत भारतीय दंड विधान की धारा 148, 323/149 (4 बार) तथा धारा 307/149 भा.दं.वि. (घातक हथियार से जानलेवा हमला एवं हत्या का प्रयास) के गंभीर व जघन्य अपराधों में दोषसिद्ध पाते हुए अधिकतम 05 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है। उक्त निर्णय के परिपालन में विजय कुमार यादव 03 जनवरी 2026 से 09 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में सजा भुगतने हेतु निरुद्ध रहे हैं।
जारी आदेश में बताया गया है कि विजय कुमार यादव का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के सर्वथा विपरीत होकर अक्षम्य कदाचरण है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) के द्वितीय परंतुक (a) तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 19 (i) के तहत यह स्पष्ट विधिक प्रावधान है कि दांडिक न्यायालय द्वारा आपराधिक आरोप में दोषसिद्ध शासकीय सेवक के विरुद्ध केवल उस आचरण के आधार पर जिस पर दोषसिद्धि हुई है, सीधे सेवा समाप्ति की शास्ति अधिरोपित की जा सकती है।
अतः सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी होने के नाते जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (आठ) सपठित नियम 19(i) तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) (a) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए विकासखण्ड उदयपुर के शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को दोषसिद्ध आचरण एवं घोर नैतिक अधमता के आधार पर तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पदच्युत/बर्खास्त किया गया है।
जारी आदेश में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (आठ) के अनुसार यह पदच्युति भविष्य में शासन के अधीन किसी भी नियोजन/पुनर्नियोजन के लिए सामान्यतः निरर्हता होगी। यदि भविष्य में माननीय अपीलीय न्यायालय (उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय) द्वारा संबंधित कर्मचारी को उक्त आपराधिक प्रकरण में पूर्णतः दोषमुक्त किया जाता है, तो वे सेवा पुनर्बहाली हेतु नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के पात्र होंगे।

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