अम्बिकापुर

अम्बिकापुर: श्री महावीर अस्पताल में कार्यरत फर्जी डॉक्टर पर FIR के निर्देश, बिना दस्तावेज के मिला लैब टेक्नीशियन, पूर्व में 1 महीने के लिए निरस्त हो चुका है लाइसेंस, मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

अम्बिकापुर:
अम्बिकापुर के चर्चित श्री महावीर अस्पताल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और साक्ष्य छिपाने के मामले में हाल ही में 1 महीने के लिए अस्पताल का संचालन लाइसेंस निरस्त किए जाने के बाद अब यहाँ एक फर्जी डॉक्टर और बिना वैध दस्तावेज के कार्यरत लैब टेक्नीशियन का बड़ा मामला उजागर हुआ है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में हुई विभागीय जांच के बाद फर्जी डॉक्टर के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने तथा अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
ICU में 2 साल से सेवाएं दे रहा था फर्जी डॉक्टर, FIR के निर्देश
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा नोडल नर्सिंग होम एक्ट की संयुक्त टीम द्वारा श्री महावीर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि डॉ. नुरूल आलम नामक व्यक्ति पिछले लगभग दो वर्षों से अस्पताल के अति-संवेदनशील आईसीयू (ICU) वार्ड में अपनी ड्यूटी दे रहा था।
जांच दल द्वारा जब डॉ. नुरूल आलम से उनकी शैक्षणिक एवं चिकित्सीय डिग्री के संबंध में जानकारी मांगी गई और उसका सत्यापन कराया गया, तो उनकी डिग्री पूरी तरह फर्जी पाई गई। आईसीयू जैसी अत्यंत संवेदनशील जगह पर फर्जी डिग्रीधारी व्यक्ति को पदस्थ कर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग ने श्री महावीर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही फर्जी डॉक्टर नुरूल आलम के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
बिना वैध दस्तावेज के मिला लैब टेक्नीशियन
जांच की कड़ी में टीम ने अस्पताल के पैथोलॉजी लैब का भी निरीक्षण किया, जहाँ सुमन राजवाड़े नामक व्यक्ति मेडिकल लैब टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत पाया गया। दस्तावेज सत्यापन के दौरान सुमन राजवाड़े भी बिना किसी वैध शैक्षणिक एवं तकनीकी दस्तावेज के कार्य करते हुए पाए गए। इस पर विभाग द्वारा उनके विरुद्ध भी वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पूर्व में भी 1 महीने के लिए निलंबित हो चुका है अस्पताल का पंजीयन
उल्लेखनीय है कि श्री महावीर अस्पताल पर यह कोई पहली गाज नहीं गिरी है। इससे पहले गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही, न्यूरो सर्जरी में गड़बड़ी, साक्ष्य छिपाने और मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली के संगीन आरोपों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक (एक महीने) के लिए अस्पताल का पंजीयन निलंबित कर दिया था।
इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों से वसूली गई अवैध राशि को वापस करने के निर्देश दिए गए थे तथा आयुष्मान भारत योजना के नियमों का उल्लंघन करने पर योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन तीन महीने के लिए निलंबित करने का प्रतिवेदन शासन को भेजा जा चुका है।
मरीजों की सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
एक तरफ जहां गंभीर लापरवाही के कारण अस्पताल का लाइसेंस पहले ही निलंबित चल रहा है, वहीं अब आईसीयू जैसे विभाग में दो साल से फर्जी डॉक्टर के कार्यरत रहने का खुलासा होने से स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।

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