एक विद्यालय में दो प्राचार्य: शासन के आदेशों की अवहेलना और संलग्नीकरण पर उठे गंभीर सवाल

लखनपुर / :
क्या एक स्कूल में दो प्राचार्य हो सकते हैं? शिक्षा विभाग और शासन के आदेशों की अवहेलना किया जाना क्या अब एक नया ट्रेंड बन चुका है? यह सवाल इन दिनों लखनपुर स्थित पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय को लेकर शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विद्यालय का संचालन अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था, जो अब खुद कई गंभीर सवालों के घेरे में नजर आ रहा है।
छत्तीसगढ़ शासन और स्कूली शिक्षा विभाग ने कुछ समय पूर्व आदेश जारी कर स्कूलों को निर्देशित किया था कि शिक्षकों व कर्मचारियों के संलग्नीकरण को तत्काल समाप्त किया जाए। इसके तहत उन्हें 15 दिनों के भीतर मूल पदस्थापना में भेजने और वहां उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी, अंबिकापुर द्वारा भी पत्र जारी कर संलग्नीकरण समाप्त करने और मूल पदस्थापना में भेजने के आदेश दिए गए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि VSK व ABES ऐप में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही जुलाई माह का वेतन आहरण किया जाएगा।
नियमों को ताक पर रखकर पद पर बने रहने का आरोप
इन तमाम निर्देशों के बावजूद, आत्मानंद विद्यालय लखनपुर में पूर्व में प्राचार्य रह चुके व्याख्याता (भौतिकी) ऋषि पांडेय अब तक इसी विद्यालय में जमे हुए हैं, जबकि वर्तमान में प्राचार्य के रूप में आर.के. विश्वकर्मा भी कार्यभार संभाले हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऋषि पांडेय की मूल पदस्थापना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सलका में है और उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंपा गया था। नियमतः, नियमित प्राचार्य की पदस्थापना होने के बाद पूर्व प्रभारी का प्रभार स्वतः समाप्त हो जाता है और उनका संलग्नीकरण भी खत्म हो जाता है। इसके बावजूद उन्हें अब तक मूल पदस्थापना के लिए कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल है।
संचालनालय और जिला शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बाद भी व्याख्याता ऋषि पांडेय का कार्यमुक्त न होना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इन शिक्षकों के सामने शासकीय आदेशों का कोई महत्व नहीं है?
सूत्रों का दावा है कि वर्तमान प्राचार्य आर.के. विश्वकर्मा इसी माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे प्राचार्य की कुर्सी खाली हो जाएगी। इसी रिक्तता को भुनाने और कथित तौर पर ‘सेटिंग’ के जरिए उन्हें दोबारा प्राचार्य की कुर्सी पर बैठाने के लिए राजनीतिक और रसूखदारों के संरक्षण में उन्हें आत्मानंद विद्यालय में रोककर रखा गया है।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने यह उजागर कर दिया है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी किस प्रकार नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।





