राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष – प्रमुख जन गोष्ठी का सफल आयोजन


अंबिकापुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पीजी कॉलेज के सभागार में ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, सह क्षेत्र प्रचारक श्री प्रेमशंकर सिदार ने संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा और ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की संकल्पना पर प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी में शहर के प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन और नागरिक कर्तव्यों के प्रति अपनी सहभागिता दर्ज की।
31 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद स्थापित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य को गति प्रदान करना है। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रमुख जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री प्रेमशंकर सिदार (सह क्षेत्र प्रचारक, मध्य क्षेत्र) ने अपने विस्तृत एवं प्रेरक उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का समग्र चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण है, और पिछले एक शताब्दी में संघ ने इसी ध्येय को लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने का निरंतर प्रयास किया है।
उन्होंने “पंच परिवर्तन” की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि व्यक्तित्व निर्माण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता—इन पाँच आयामों पर कार्य कर समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने आचरण में शुचिता, अनुशासन और राष्ट्रभाव को धारण करता है, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बनता है।
श्री सिदार ने आगे कहा कि संघ ने सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से समाज के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, सेवा, ग्राम विकास, आपदा राहत, महिला सशक्तिकरण एवं युवा जागरण—में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ किसी एक वर्ग या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए कार्य करता है, जिसमें सभी जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के लोग समान रूप से सहभागी हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय भाव जागरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” के भाव पर आधारित है, जो सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है। आज वैश्विक स्तर पर उत्पन्न चुनौतियों के बीच भारतीय विचार ही संतुलन, शांति और सहअस्तित्व का मार्ग दिखा सकता है।
द्वितीय सत्र में उपस्थित प्रमुख जनों द्वारा विभिन्न जिज्ञासाएँ प्रस्तुत की गईं, जिनमें संघ के विस्तार, महिलाओं एवं युवाओं के बीच संघ के कार्य, स्थापना काल से अब तक के विकास तथा वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों के क्षरण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए मुख्य वक्ता ने उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में इन सभी समस्याओं के समाधान निहित हैं। आवश्यकता केवल अपने श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को पुनः अपनाने की है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना विभाग सम्पर्क प्रमुख श्री नरेंद्र सिन्हा द्वारा प्रस्तुत की गई तथा आभार प्रदर्शन जिला सम्पर्क प्रमुख श्री सतीश मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में वंदे मातरम् गीत कु. हिमांगी त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पेंद्र पटेल ने की।
इस अवसर पर विभाग संघचालक श्री जलजीत सिंह, जिला संघचालक श्री भगवान दास बंसल सहित संघ के विभाग, जिला, नगर एवं खंड स्तर के दायित्ववान कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में प्रमुख बंधु-भगिनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री कृष्णा त्रिपाठी ने कुशलतापूर्वक किया।





