संत जॉन कैथोलिक आश्रम के ‘पुरोहित दीक्षा समारोह’ पर उठा विवाद, ‘धर्म जागरण समन्वय’ ने कलेक्टर से की छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत जांच की मांग

बलरामपुर-रामानुजगंज:
जिले के संत जॉन कैथोलिक आश्रम, धनवार कला में 14 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित पुरोहित अभिषेक तथा 15 अक्टूबर 2026 को सुरगीकला में आयोजित होने वाले धन्यवाद समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक संगठन ‘धर्म जागरण समन्वय’ ने इस आयोजन की विधिक प्रक्रियाओं, अभ्यर्थी की सामाजिक व जातीय पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुमतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को एक विस्तृत शिकायत सह-अभ्यावेदन सौंपा है। संगठन ने क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

कलेक्टर को सौंपे गए अभ्यावेदन के अनुसार, निमंत्रण पत्र में मुख्य पुरोहित के रूप में दीक्षा लेने वाले अभ्यर्थी एवं उनके परिवार का उपनाम ‘हड्डे’ दर्शाया गया है, जो स्थानीय स्तर पर ‘कोड़ाकू’ (अनुसूचित जनजाति) समुदाय का पारंपरिक गोत्र व उपनाम है। संगठन का कहना है कि यह पृष्ठभूमि मूलतः हिंदू जनजातीय रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है। ऐसे में प्रशासनिक और राजस्व अभिलेखों में यह जांच करना आवश्यक है कि क्या संबंधित व्यक्ति अथवा उनके परिवार द्वारा वर्तमान में भी जनजाति वर्ग के वैधानिक प्रमाण पत्र और उससे मिलने वाले शासकीय लाभ प्राप्त किए जा रहे हैं, जबकि वे ईसाई धर्म के सर्वोच्च पुरोहिताई (पादरी/फादर) की दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अभ्यावेदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम तथा संबंधित विधिक नियमावली का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा धर्म परिवर्तन करने या कराने वाले धर्मगुरु अथवा संस्था के लिए जिला दंडाधिकारी के समक्ष विहित प्रारूप में पूर्व सूचना और आवेदन प्रस्तुत करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। संगठन ने प्रश्न उठाया है कि संबंधित व्यक्ति को किस तिथि, किस स्थान और किस विधिक प्रक्रिया के तहत ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया तथा क्या इससे पूर्व सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति अथवा विधिक पंजीकरण कराया गया था।
धर्म जागरण समन्वय ने यह भी आशंका जताई है कि बलरामपुर और सरगुजा के ग्रामीण तथा वनांचल क्षेत्रों में बिना विधिक सूचना के ऐसे सार्वजनिक आयोजनों के माध्यम से अन्य ग्रामीणों को प्रभावित करने अथवा अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और शांति भंग होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इन सभी संवेदनशील तथ्यों के आधार पर संगठन ने जिला दंडाधिकारी से मांग की है कि कलेक्टर कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच कर यह प्रमाणित किया जाए कि क्या धर्मांतरण हेतु कोई वैधानिक आवेदन पूर्व में प्रस्तुत किया गया था। यदि ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है, तो इसकी जांच की जाए कि किस प्राधिकार के तहत यह पुरोहिताभिषेक कराया जा रहा है। साथ ही अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) एवं पुलिस बल की उपस्थिति में संपूर्ण कार्यक्रम की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाए, वैधानिक अनुमतियां न पाए जाने पर कार्यक्रम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और नियमों की अवहेलना सिद्ध होने पर आयोजकों व संबंधित धर्मगुरुओं के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाए।



