राष्ट्रीय

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणामः पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार, असम में हिमंत बिस्वा सरमा की वापसी, तमिलनाडु में हिंदी व उत्तर भारतीय विरोध की द्रविड़ राजनीति के अंत की शुरुआत के बीच थलपति विजय की टीवीके की जीत, पुडुचेरी में एनडीए की सरकार,और केरल में कांग्रेस- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग गठबंधन (UDF) की सत्ता …

हिन्द शिखर न्यूज़ । पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने आज भारतीय लोकतंत्र के फलक पर एक अमिट इबारत लिख दी है। पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु और केरल से लेकर असम तक, जनादेश की गूँज ने स्थापित राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत महज एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति के रूप में उभरी है। राज्य की 294 सीटों में से 197 से अधिक सीटों पर भाजपा की बढ़त ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल के मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में निर्णायक फैसला सुनाया है। इस जीत का सबसे प्रमुख आधार हिंदू मतों का अभूतपूर्व ‘कंसोलिडेशन’ रहा है, जिसने संदेशखाली और हालिया प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ एक मजबूत जनादेश तैयार किया। तृणमूल कांग्रेस, जो पिछले डेढ़ दशक से अपराजेय मानी जा रही थी, अब केवल 96 सीटों के आसपास सिमटकर विपक्ष की भूमिका में नजर आ रही है।

दक्षिण के द्वार केरलम में भी सत्ता परिवर्तन की लहर ने वामपंथी किलों को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटों पर बढ़त हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस बड़ी जीत के पीछे कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का अटूट गठबंधन और मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं का रणनीतिक झुकाव रहा है, जिसने एलडीएफ के ‘विकास मॉडल’ के दावों को पीछे छोड़ दिया। वामपंथी गठबंधन महज 37 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, जो राज्य में पिनाराई विजयन युग के अंत का संकेत है।
तमिलनाडु की राजनीति में भी इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ दशकों से प्रभावी द्रविड़ मूवमेंट वाली पार्टियों का आधार दरक गया है। हिंदी विरोध और उत्तर भारतीय विरोध की राजनीति करने वाली डीएमके और एआईएडीएमके को राज्य की जनता ने इस बार किनारे कर दिया है। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम ने 234 में से 107 सीटों पर बढ़त बनाकर यह साबित कर दिया है कि राज्य का युवा अब नई सोच और विकल्प की तलाश में है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके केवल 58 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो उनकी राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है।
पूर्वोत्तर के प्रहरी असम में भाजपा ने अपनी पकड़ और मजबूत की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने 126 में से 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर जीत की हैट्रिक पूरी की है। विकास और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे पर असम की जनता ने एक बार फिर कमल पर भरोसा जताया है।

वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी एनडीए गठबंधन 20 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को छूता हुआ दिखाई दे रहा है। इन परिणामों का विश्लेषण करें तो यह साफ होता है कि अब देश की रराजनीति अब भाषाई और क्षेत्रीय कट्टरवाद के बजाय नए समीकरणों की ओर बढ़ चुकी है।

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