धर्मांतरण के बाद ईसाई बने व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दावा नहीं कर सकते: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म स्वीकार कर लेता है तो वह अनुसूचित जाति (Scheduled Caste – SC) का दावा नहीं कर सकता और इस प्रकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 2015 के तहत सुरक्षा का हकदार नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों तक ही सीमित है।
न्यायमूर्ति एन. हरिनथ की एकल पीठ ने गुंटूर जिले से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इस मामले में एक ईसाई पादरी ने कुछ व्यक्तियों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने ईसाई धर्म अपना लिया है, जिसके कारण वह अब अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह गया है और इसलिए वह इस विशेष कानून के तहत सुरक्षा का दावा करने का हकदार नहीं है।
अदालत ने अपने फैसले में संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का हवाला दिया, जो स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करता है कि केवल हिंदू धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति ही अनुसूचित जाति के माने जाएंगे। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मौजूद नहीं है, और परिणामस्वरूप, ईसाई धर्म अपनाने के बाद कोई भी व्यक्ति स्वतः ही अपनी पूर्व अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है।
न्यायमूर्ति हरिनथ ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जाति प्रमाण पत्र का रद्द न होना किसी व्यक्ति को धर्मांतरण के बाद भी अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक धार्मिक पहचान ही इस मामले में निर्णायक कारक है।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी राज्य में धर्मांतरित ईसाई समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। अब ऐसे व्यक्ति जो धर्मांतरण के बाद ईसाई बन गए हैं, वे एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी सुरक्षा का दावा करने में सक्षम नहीं होंगे। इस फैसले से राज्य में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस छिड़ने की संभावना है, जिसमें धर्मांतरित समुदायों के अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों पर विचार किया जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का आने वाले समय में इस समुदाय के कानूनी और सामाजिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।





