चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद बंगाल की खाड़ी में नए तूफान का खतरा: सरगुजा में 5 दिन बारिश के आसार, मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा किसानों को सतर्क रहने, कटी फसल सुरक्षित रखने की सलाह
अंबिकापुर ।हाल ही में असर दिखाने वाले चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के बाद देश के तटीय राज्यों पर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि बंगाल की खाड़ी में एक नया और शक्तिशाली मौसम सिस्टम तेजी से सक्रिय हो रहा है। दक्षिण अंडमान सागर से उठे इस कम दबाव के क्षेत्र ने अब और अधिक मजबूती हासिल कर ली है और यह दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया) के रूप में तब्दील हो चुका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी प्रणाली अगले कुछ ही घंटों में गहरे अवсад (डिप्रेशन) का रूप ले सकती है और आगामी 24 घंटों के भीतर इसके एक तीव्र चक्रवाती तूफान में बदलने की पूरी आशंका है।
इस नए सिस्टम की गति और दिशा को लेकर जारी किए गए पूर्वानुमानों ने प्रशासन और तटीय इलाकों के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, यह संभावित चक्रवात लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ेगा। इसके 2 नवंबर की शाम तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों के बेहद करीब पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि मौसम विभाग ने अभी तक इस तूफान के तट से टकराने यानी लैंडफॉल की सटीक जगह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में इसके व्यापक और गंभीर असर को लेकर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
इस संभावित चक्रवात के असर से देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 2 से 4 नवंबर के बीच तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पुडुचेरी में गरज-चमक के साथ मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही इस वेदर सिस्टम के प्रभाव से केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के भी कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। तटीय इलाकों में समुद्र की लहरें उग्र होने और तेज रफ्तार हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। आपदा प्रबंधन टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
चक्रवात ‘अर्नब’ के असर को झेल चुके छत्तीसगढ़ में भी इस नए मौसमी तंत्र का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, पहले से ही नम मौसम के बीच इस नए सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों, विशेषकर बस्तर संभाग और दक्षिणी इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। राज्य में 3 और 4 नवंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने (लाइटनिंग) का येलो अलर्ट जारी किया गया है। अर्नब तूफान के कारण राज्य के रायपुर और सरगुजा संभाग में लगातार हुई बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है और स्कूलों को बंद करना पड़ा था। अब इस नए तूफान की आहट को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रशासन ने किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है और सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं।
छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में स्थित सरगुजा संभाग (अम्बिकापुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) पर इस नए चक्रवात का सीधा असर देखने को मिलेगा। कृषि मौसम विज्ञान इकाई (एएमएफयू) अम्बिकापुर के अनुसार, सरगुजा जिले में 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक लगातार पांच दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने और प्रतिदिन 10 से 15 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। विशेष रूप से 31 अक्टूबर, 1 नवंबर और 3 नवंबर को गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है, जबकि 3 नवंबर को तेज झोंकेदार हवाएं भी चल सकती हैं।
मौसम की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। किसानों को कटी हुई धान की फसल और अन्य उपज को खुले खेतों में न छोड़कर तत्काल सुरक्षित, सूखे स्थानों या सोसायटियों के शेड में पहुंचाने और जलरोधी तिरपाल से ढकने की सख्त सलाह दी गई है। इसके साथ ही खेतों में जलभराव रोकने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए नालियां बनाने तथा सब्जियों व दलहनी फसलों को फफूंदजनित रोगों से बचाने के लिए नियमित निगरानी करने को कहा गया है। कृषि मौसम विज्ञान इकाई ने किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान खुले खेतों, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे आश्रय न लें और गरज-चमक शुरू होते ही तुरंत किसी सुरक्षित पक्के भवन के भीतर चले जाएं।



