कोरियासरगुजा संभाग

कोरिया का चर्चित नौगई तिहरा हत्याकांड: जांच के लिए बैकुंठपुर पहुंची CBI की टीम, केस डायरी और साक्ष्यों को खंगाला

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले को दहला देने वाले चर्चित नौगई तिहरे हत्याकांड की कमान अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद एक्शन में आई सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम सोमवार को बैकुंठपुर पहुंची। टीम ने चरचा स्थित पंचवटी रेस्ट हाउस में अपनी आमद दर्ज कराई और बिना वक्त गंवाए सीधे घटनास्थल का मुआयना करने निकल गई। केंद्रीय एजेंसी की यह टीम वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखकर क्राइम सीन का बारीकी से री-क्रिएशन कर रही है। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक तैयार किए गए कानूनी दस्तावेज, केस डायरी और जब्त किए गए साक्ष्यों की भी गहन समीक्षा की जा रही है। मामले की तह तक जाने के लिए जांच टीम संबंधित पुलिस अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों और संदिग्धों से पूछताछ कर घटनाक्रम की बिखरी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।


गौरतलब है कि बीती 16-17 जून की दरम्यानी रात सोनहत क्षेत्र के ग्राम कटगोड़ी (नौगई) में हुई इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। घटना के वक्त भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों के साथ फॉर्च्यूनर वाहन में सवार होकर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दूसरे पक्ष ने एक पुराने विवाद को सुलझाने और समझौते के बहाने उन्हें वहां बुलाया था। लेकिन जैसे ही वे मौके पर पहुंचे, घात लगाए हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया और उनकी गाड़ी में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस बर्बर हमले में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि उनके दो साथियों—वीरेंद्र सिंह उर्फ वीरू और नागेंद्र सिंह—ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।


इस तिहरे हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह रेत उत्खनन (रेत खदान) को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई बताई जा रही है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पकड़े गए मुख्य आरोपियों में मनोज त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अक्षय त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मन्नू त्रिपाठी सहित अन्य लोग शामिल हैं। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील था और इसमें राजनीतिक व खनन माफिया से जुड़े तार सामने आ रहे थे, इसीलिए कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष न्याय की मांग को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने वारदात के महज दो हफ्ते बाद, यानी 30 जून को इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी, जिस पर अब केंद्रीय एजेंसी तेजी से आगे बढ़ रही है।

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