कोरियासरगुजा संभाग

कोरिया में रेत कारोबार की खूनी जंग : फॉर्च्यूनर सवार भाजपा नेता को जिंदा जलाया, हमले में घायल एक और व्यक्ति की अंबिकापुर अस्पताल में मौत जबकि दो नाजुक हालत में रायपुर रेफर, आधी रात को मौके पर पहुंचे आईजी..

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत इलाके में आने वाले नौगई गांव में एक ऐसी खूनी वारदात सामने आई है जिसने राज्य की कानून व्यवस्था और सत्ताधारी दल के भीतर चल रही आपसी खींचतान दोनों को उजागर कर दिया है। यहां रेत के अवैध कारोबार में वर्चस्व कायम करने की होड़ में भारतीय जनता पार्टी के ही दो गुट आपस में भिड़ गए। इस खूनी रंजिश का अंजाम बेहद खौफनाक रहा, जहां वरिष्ठ भाजपा नेता और रसूखदार व्यवसायी भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह को उनकी ही फॉर्च्यूनर गाड़ी में जिंदा फूंक दिया गया। घटना की वीभत्सता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग की लपटों में घिरकर गाड़ी पूरी तरह खाक हो गई और भाजपा नेता का शरीर बुरी तरह झुलस गया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं इस हमले में गंभीर रूप से झुलसे तीन अन्य साथियों में से एक ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दम तोड़ दिया है, जबकि दो अन्य को बेहद नाजुक हालत में रायपुर रेफर किया गया है।
यह पूरी घटना मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात करीब ग्यारह से बारह बजे के बीच की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक भरत सिंह गहरवार अपने कुछ साथियों के साथ दो गाड़ियों में सवार होकर नवगई गांव के भीतर पहुंचे थे। वहां पहले से घात लगाए बैठे दूसरे पक्ष के लोगों ने, जिनका नेतृत्व भी भाजपा से जुड़े अघोषित रेत कारोबारी मनोज त्रिपाठी और उनका बेटा कर रहे थे, करीब तीस से चालिस की संख्या में हमलावरों के साथ मिलकर पीड़ित पक्ष को घेर लिया। हमलावरों ने बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया। उन्होंने सबसे पहले एक भारी-भरकम टिपर वाहन से भाजपा नेता की फॉर्च्यूनर कार को कई बार जोरदार टक्कर मारी। इस जबरदस्त टक्कर के कारण कार के दरवाजे पूरी तरह से लॉक और जाम हो गए, जिससे अंदर बैठे लोग किसी भी सूरत में बाहर न निकल सकें। इसके तुरंत बाद हमलावरों ने वाहन पर पेट्रोल उड़ेलकर उसे आग के हवाले कर दिया। चश्मदीदों के अनुसार, जब गाड़ी के भीतर फंसे लोग जान बचाने के लिए शीशे तोड़कर बाहर निकलने की जद्दोजहद कर रहे थे, तब बाहर खड़े हमलावर उन पर लाठी-डंडों से वार कर रहे थे ताकि कोई भी जिंदा न बच सके।
इस खूनी संघर्ष के पीछे इलाके में चलने वाला रेत का कारोबार और आपसी राजनीतिक रसूख की लड़ाई बताई जा रही है। दरअसल, मरने वाले भरत सिंह और आरोपी मनोज त्रिपाठी दोनों ही भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय चेहरों में गिने जाते हैं और इलाके में बिना किसी आधिकारिक ठेके के चल रहे रेत के इस कारोबार को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। घटना वाले दिन मंगलवार की शाम को भी दोनों पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ था, जिसमें मृतक और उसके साथियों द्वारा रेत कारोबारी मनोज त्रिपाठी की पिटाई किए जाने की बात सामने आई है। यह मामला सोनहत थाने तक भी पहुंचा था, लेकिन पुलिस की ढिलाई या लापरवाही के कारण रात होते-होते इस विवाद ने एक बड़े हत्याकांड का रूप ले लिया। जब देर रात भरत सिंह दोबारा अपने साथियों के साथ मनोज त्रिपाठी के घर की तरफ गए, तो पहले से खुन्नस खाए बैठे आरोपियों ने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे दिया।
सत्तारूढ़ दल के दो बड़े चेहरों के बीच हुए इस खूनी खेल और आगजनी की खबर फैलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा आधी रात को ही खुद भारी पुलिस बल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी के करीबियों समेत चार लोगों को हिरासत में ले लिया है, जबकि बाकी फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और सरगुजा आईजी ने अधिकारियों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष और गहन जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। यह घटना क्षेत्र में रेत के अवैध धंधे में संलिप्त लोगों के बढ़ते दुस्साहस और सत्ता की आड़ में पनप रही आपसी रंजिश का एक खौफनाक उदाहरण बन गई है।

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