ईरान-इजरायल तनाव का असर: भारत में ईंधन की कमी की आहट, सरकार ने लागू किया ‘एस्मा’ और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू; आपूर्ति की समय सीमा 15 दिन से बढ़कर हुआ 21 दिन , कालाबाजारी पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान..

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की भारी कमी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन भंडारों में आई इस गिरावट का असर अब भारतीय बाजारों पर भी पड़ने लगा है। इस स्थिति को भांपते हुए भारत सरकार ने देश में गैस की किल्लत को रोकने और किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) और एस्मा (ESMA) के कड़े प्रावधानों को लागू कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य संकट की इस घड़ी में ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना और अवैध भंडारण करने वालों पर नकेल कसना है।
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल प्लांटों के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब गैस का उपयोग औद्योगिक कार्यों या पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकेगा। इस गैस को अब अनिवार्य रूप से सीधे एलपीजी पूल में भेजा जाएगा ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बाधित न हो। केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गजट में स्पष्ट किया गया है कि रसोई गैस घरों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है, इसलिए औद्योगिक हितों के ऊपर आम नागरिक की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। अब रिफाइनरियों को अपनी पूरी क्षमता का उपयोग केवल घरेलू एलपीजी उत्पादन के लिए करना होगा।

आम उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर वितरण के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित करने के लिए अब दो सिलेंडरों के बीच की आपूर्ति समय सीमा को 15 दिन से बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर प्राप्त करने के लिए कम से कम 21 दिनों का इंतजार करना होगा। देश की प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—ने अपने वितरण सॉफ्टवेयर में यह बदलाव लागू कर दिया है। हालांकि बुकिंग पहले की तरह की जा सकेगी, लेकिन सिलेंडर की पर्ची 21वें दिन ही जारी होगी।
सरकार ने कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी गैस की कालाबाजारी या जमाखोरी में संलिप्त पाई जाती है, तो उसे 3 महीने से लेकर 7 साल तक की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। खाद्य और ईंधन से जुड़े अपराधों में कम से कम 3 महीने की अनिवार्य सजा का नियम बनाया गया है ताकि कानून का डर बना रहे। हालांकि, तेल कंपनियों के अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश में सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है और ये कदम केवल भविष्य की सुरक्षा और सुचारू वितरण के लिए उठाए गए हैं।




