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छत्तीसगढ़ की पीईकेबी कोयला खदान को पांचवीं बार मिला सर्वोच्च ‘5-स्टार’ सम्मान, राष्ट्रीय स्तर पर गाड़े झंडे

कोयला मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए '5 स्टार अचीवर्स प्राइज' से नवाजा; सुरक्षित और सतत खनन के लिए मिली राष्ट्रीय पहचान

अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित परसा ईस्ट एंड कांटा बासन, पीईकेबी ओपनकास्ट कोयला खदान ने देश के खनन उद्योग में एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता का लोहा मनवाया है। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आयोजित वार्षिक स्टार रेटिंग मूल्यांकन में पीईकेबी को प्रतिष्ठित ‘5-स्टार रेटिंग’ के साथ-साथ ‘5 स्टार अचीवर्स प्राइज’ से सम्मानित किया गया है। यह लगातार पांचवां अवसर है जब इस खदान को यह राष्ट्रीय गौरव प्राप्त हुआ है।

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार गत दो नवंबर को रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित ‘स्टार रेटिंग अवार्ड समारोह-2026’ के दौरान कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान खदान को सुरक्षित, दक्ष, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल खनन पद्धतियों, उच्च सुरक्षा मानकों तथा परिचालन उत्कृष्टता के लिए दिया गया है।

मालूम हो कि पीईकेबी खदान का संचालन परसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की तापीय विद्युत परियोजनाओं के लिए कोयले का मुख्य स्रोत है। यहाँ से आपूर्ति होने वाला कोयला राजस्थान की 4,340 मेगावाट क्षमता वाली तापीय विद्युत इकाइयों को ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से, माइन डेवलपर एवं ऑपरेटर के रूप में अदाणी नेचुरल रिसोर्सेज द्वारा संचालित पीईकेबी और गारे पेलमा सेक्टर-तीन दोनों खदानों को यह 5-स्टार रेटिंग हासिल हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन के तहत देश भर की केवल 50 कोयला खदानों (15 भूमिगत और 35 ओपनकास्ट) को 5-स्टार रेटिंग से नवाजा गया है। इनमें छत्तीसगढ़ की मात्र पाँच खदानों का शामिल होना राज्य के लिए गौरव का विषय है।

कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है। इसमें उत्पादन, परिचालन दक्षता, तकनीकी नवाचार, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के कल्याण जैसे कड़े पैमानों पर खदानों को परखा जाता है।

पीईकेबी खदान में खनन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्वास, जैव विविधता संवर्धन और हरित आवरण के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाता है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि खदान उत्पादकता, पर्यावरणीय संतुलन और राष्ट्रीय ऊर्जा आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाते हुए जिम्मेदार खनन का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत कर रही है। यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल यहाँ कार्यरत इंजीनियरों, खनिकों और प्रबंधन के समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लक्ष्यों को भी नई दिशा दे रहा है।

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