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आंध्र तट से टकराया, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’, उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में बदला मौसम…

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना मौसमी सिस्टम आधिकारिक तौर पर एक गहरा दबाव (Deep Depression) है। आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि इस तंत्र ने पूर्ण चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) के लिए आवश्यक तीव्रता हासिल नहीं की है, इसलिए इसे आधिकारिक रूप से चक्रवात के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्ट्स में इसे बांग्लादेश द्वारा सुझाए गए नाम ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) के रूप में लगातार प्रसारित किया जा रहा है, जिसका बंगाली भाषा में अर्थ ‘महासागर’ होता है।

इस मौसमी तंत्र ने उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों (विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच, कलिंगपट्टनम के पास) को पार करते हुए लैंडफॉल की प्रक्रिया को पूरा किया है। तट को पार करते समय इसके केंद्र के आसपास हवाओं की गति लगभग 55 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अंदरूनी जमीनी इलाकों में प्रवेश करने के बाद भी अगले 12 से 24 घंटों तक इस सिस्टम की तीव्रता गहरे दबाव के रूप में बनी रहने की संभावना है। इस शक्तिशाली मौसमी हलचल के मद्देनजर ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, तथा सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाकों में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।

तटीय इलाकों में लैंडफॉल करने के बाद, उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहे इस शक्तिशाली मौसमी तंत्र की वजह से अब उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। संभाग के सभी जिलों—सरगुजा (अंबिकापुर), सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)—में आसमान पर घने काले बादलों का डेरा जमा हुआ है। लगातार चल रही ठंडी हवाओं के कारण दिन के अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे समूचे इलाके में मौसम अचानक ठंडा हो गया है और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अंदरूनी जमीनी इलाकों में प्रवेश करने के बाद यह सिस्टम अपनी सक्रियता अगले कुछ घंटों तक बनाए रखेगा, जिसके चलते आगामी 48 से 72 घंटों के दौरान सरगुजा संभाग के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से संभाग के मैदानी और मैनपाट व सामरीपाट जैसे पहाड़ी क्षेत्रों (पाट प्रदेशों) में लगातार रिमझिम फुहारें गिरने और घना कोहरा व धुंध छाने का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि, मौसम विभाग का यह भी अनुमान है कि आगामी 24 से 48 घंटों में यह सिस्टम धीरे-धीरे उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए कमजोर पड़ता जाएगा, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका असर अभी कुछ दिनों तक बना रहेगा। इस दौरान संभाग के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली चमकने की भी आशंका है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
तूफानों के नामकरण की प्रक्रिया और देशों की भूमिका
उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सहित) में उठने वाले चक्रवातों के नामकरण की एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के पैनल के अंतर्गत कुल 13 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन शामिल हैं।

इस प्रक्रिया के तहत नियमों के अनुसार:

रोटेशन सूची: सभी 13 देश अपने-अपने सुझावों की सूची पहले ही वैश्विक पैनल को सौंपते हैं, जिसके आधार पर क्रमिक रूप से (रोटेरियन प्रणाली के तहत) नाम तय किए जाते हैं। जैसे वर्तमान चर्चा में ‘अर्नब’ नाम बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया है।
नियम और शर्तें: मौसम विभाग के प्रावधानों के मुताबिक, किसी मौसमी सिस्टम को आधिकारिक तौर पर नाम तभी दिया जाता है जब वह डिप्रेशन या डीप डिप्रेशन की सीमारेखा को पार करते हुए कम से कम 62 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक हवा की रफ्तार वाले पूर्ण ‘चक्रवाती तूफान’ (Cyclonic Storm) की श्रेणी में विकसित हो जाता है। चूंकि यह सिस्टम केवल ‘गहरे दबाव’ (Deep Depression) की अवस्था तक ही सीमित रहा और चक्रवात की आवश्यक तीव्रता तक नहीं पहुंच पाया, इसलिए आईएमडी द्वारा इसे आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘अर्नब’ नाम नहीं दिया गया है।

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