महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से मांगी माफी, कहा नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती: ‘हम हारे नहीं, हर रुकावट हटाकर रहेंगे’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम एक विशेष और भावुक संबोधन देते हुए महिला आरक्षण बिल के संसद में पारित न हो पाने पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त किया है। उन्होंने देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगते हुए कहा कि वे बेटियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी निष्ठा से आए थे, लेकिन स्वार्थी राजनीति ने इस मार्ग में बड़े रोड़े अटका दिए हैं। प्रधानमंत्री ने अत्यंत कड़े शब्दों में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि इन लोगों ने सदन के भीतर महिला अधिकारों की भ्रूण हत्या की है। उन्होंने कहा कि जब नारी हित का यह प्रस्ताव गिरा, तब विपक्ष द्वारा मेजें थपथपाकर खुशियां मनाना देश की हर महिला के आत्मसम्मान और स्वाभिमान पर गहरी चोट थी। मोदी ने स्पष्ट किया कि नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान वह कभी नहीं भूलती है और इस कृत्य की सजा विपक्ष को देश की जागरूक जनता और नारी शक्ति जरूर देगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पिछले 40 वर्षों से लटके हुए महिलाओं के हक को 2029 के लोकसभा चुनाव से दिलाने का एक पवित्र प्रयास और 21वीं सदी की नारी को नई उड़ान देने वाला महायज्ञ था। सरकार की मंशा थी कि देश की आधी आबादी को उनका वाजिब अधिकार मिले ताकि वे भारत की विकास यात्रा में बराबर की सहयात्री बन सकें। विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि इन परिवारवादी पार्टियों को असल में इस बात का डर सता रहा है कि अगर सामान्य घरों की महिलाएं वास्तव में सशक्त और आत्मनिर्भर हो गईं, तो उनका वर्षों पुराना राजनीतिक और पारिवारिक नेतृत्व हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगा। पीएम ने कहा कि ये दल कभी नहीं चाहते कि उनके परिवार के दायरे से बाहर की कोई सामान्य महिला राजनीति में आगे बढ़े, इसलिए उन्होंने पूरी राजनीतिक ताकत लगाकर इस संशोधन को रुकवा दिया।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की कार्यशैली की आलोचना करते हुए उसे एंटी-रिफॉर्म पार्टी करार दिया और कहा कि यह दल आज भी अंग्रेजों से विरासत में मिली बांटो और राज करो की नीति के सहारे चल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है और अब परिसीमन या डी-लिमिटेशन को लेकर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा। पीएम मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि सरकार ने पहले दिन से यह स्पष्ट कर रखा है कि न तो किसी राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा और न ही किसी का प्रतिनिधित्व कम होगा, बल्कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की नीति हमेशा से ही कार्यों को लटकाने, अटकाने और भटकाने की रही है, जिसके कारण भारत उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया जिसका वह हकदार था।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कड़ा संकल्प दोहराते हुए कहा कि उनकी सरकार के लिए देशहित हमेशा दलहित से ऊपर रहा है और वे इस हार से रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में हर रुकावट को दूर कर महिलाओं को उनका अधिकार निश्चित रूप से प्रदान किया जाएगा क्योंकि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जनधन योजना, डिजिटल पेमेंट, ट्रिपल तलाक कानून और सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने जैसे हर क्रांतिकारी निर्णय का विरोध किया है, लेकिन राष्ट्र की प्रगति का यह पहिया थमेगा नहीं। पीएम मोदी का यह संबोधन साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में नारी शक्ति का यह अपमान देश की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनने वाला है।




