सरगुजिहा बोली के कारण छात्र को प्रवेश न देने वाले अम्बिकापुर के निजी स्कूल पर 1 लाख का जुर्माना, संचालन भी बंद
अंबिकापुर । शहर के चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशानी एजूकेशन सोसायटी) के खिलाफ यह कार्रवाई एक 04 वर्षीय बालक को प्रवेश न देने के मामले में की गई है। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार चैनलों पर यह खबर प्रमुखता से आई थी कि उक्त विद्यालय ने बालक को सिर्फ इसलिए दाखिला नहीं दिया क्योंकि वह हिंदी बोलने में असमर्थ था और सरगुजिहा में बात करता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पहले संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि विद्यालय प्रबंधन बालक के पिता से कहा गया कि उनके स्कूल में बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं और वे भी इस बालक की तरह सरगुजिहा बोलना सीख जाएंगे। स्कूल ने यह तर्क भी दिया कि उनके शिक्षक बच्चे की भाषा समझने में असमर्थ हैं, इसलिए उसे वहां स्थायी प्रवेश नहीं मिल सकता। मामले की निष्पक्ष जांच हेतु श्रीमती रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में न केवल भाषाई भेदभाव की पुष्टि की, बल्कि यह गंभीर खुलासा भी किया कि यह शिक्षण संस्थान बगैर किसी सरकारी मान्यता के अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।
जांच रिपोर्ट और संस्था द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर घटना प्रमाणित होने के पश्चात जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश क्रमांक 5804 के माध्यम से स्कूल पर 1 लाख रुपये का भारी अर्थदण्ड लगाया है। साथ ही, बिना मान्यता संचालन और भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण आगामी आदेश तक संस्था के समस्त शैक्षणिक कार्यों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। विभाग ने इस दौरान स्कूल प्रबंधन द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने के दावे को भी रिकॉर्ड में लिया है।
स्कूल के बंद होने से वहां पहले से पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर को निर्देश दिए गए हैं कि वे उक्त विद्यालय में अध्ययनरत सभी बच्चों का उनकी सुविधानुसार अन्य वांछित विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित कराएं।






