चरमराई शिक्षा व्यवस्था शराब पीकर स्कूल पहुंचे शिक्षक विशेष आरक्षित जनजाति के बच्चों का भविष्य अधर में खबर प्रकाशित न करने को लेकर पत्रकारों को शराबी शिक्षक दे रहे थे पैसा

लखनपुर ।सरगुजा जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है। यहां स्कूल में शिक्षक शराब पीकर बच्चों को पढ़ाने पहुंच रहे हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा। पुरा मामला सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला लब्जी का है। इस स्कूल में विशेष जनजाति के करीब 38 बच्चे अध्यनरत है। इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी दो शिक्षकों की है। वही एक शिक्षक अपने ट्रेनिंग में चले जाते हैं तो दूसरे शिक्षक पौलुस तिर्की शराब पीकर स्कूल पहुंच जाते हैं ऐसे में वह बच्चों को क्या पढ़ा रहे होंगे इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। शिक्षक शराब में मस्त हैं तो बच्चे खेलने में मग्न हो गए,,आप को बताना लाजमी होगा की शिक्षा विभाग में फैली अवस्थाएं और शिक्षकों की इस प्रकार की हरकतों को स्कूल से बाहर न निकले और लोगो के बिच न आए इसके लिए लखनपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने भी तुगलकी फरमान जारी कर दिया कि बच्चों के परिजन और विभागीय अधिकारीयो के अलावा बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर के अंदर साला समय में प्रवेश न कर सके। अब इस फरमान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग अपने कमियो को छुपाने के लिए इस प्रकार हथकंडे अपना रहा है। शिक्षक शराब के नशे में धुत है और स्वीकार भी कर रहे हैं कि वह शराब पीकर आए हैं जब मीडिया कर्मियों ने उनसे बातचीत की तब वह कैमरे से बचते नजर आए वही मामले को आगे नहीं बढ़ने के लिए पैसे भी दे रहे हैं।एक ओर जहां जिले के कलेक्टर शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने जंगल और पहाड़ियों में पैदल चलकर स्कूल के संचालक को देखने पहुंच रहे हैं। तो वहीं कई ऐसे स्कूल है जहां इस प्रकार के शिक्षक पदस्थ हैं और बेधड़क शराब पीकर स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं हालांकि अब देखना होगा कि जिले के कलेक्टर और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को लेकर किस प्रकार की कार्यवाही करते हैं।
“”””खंड शिक्षा अधिकारी का तुगलकी फरमान”””
लखनपुर विकासखंड में शिक्षा विभाग में फैली अव्यवस्थाओं को लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जा रहा था। खंड शिक्षा अधिकारी यह नागवार गुजरा और शिक्षा स्तर में सुधार करने के बजाय 13 अगस्त 2024 को एक तुगलकी फरमान जारी किया गया जिसमें बच्चों के परिजन और विभागीय अधिकारियों के अलावा बाहरी व्यक्तियो को साला समय में प्रवेश न कर सके। जब स्थानीय पत्रकारों के द्वारा तुगलकी फरमान को लेकर विरोध जताया गया। तो खंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा 10 सितंबर दिन मंगलवार को इस तुगलकी फरमान को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया।





