राष्ट्रीय

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने नवरात्रि को दिया नौटंकी का दर्जा , साधू- संतो को बताया आतंकवादी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या ने हिंदू धर्म पर जमकर सियासी निशाना साधा। जहां मानस की कई चौपाइयों पर सवाल उठाए। वहीं साधू-संतोें को आतंकवादी-कसाई का दर्जा देने के साथ ही, नवरात्रि में की जाने वाली शक्ति पूजा तक को नौटंकी का दर्जा दे डाला। मोहन भागवत की तरफ से जातिवादी व्यवस्था पर की गई टिप्पणी को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए। सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट गोवंश आश्रम स्थल पर भी सवाल उठाते हुए, जानवरों के लिए पाठशाला खोलने तक की वकालत कर डाली। स्वामी प्रसाद मौर्य राबटर्सगंज तहसील के मऊकला गांव में आयोजित बौद्ध महोत्सव के मंच से कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे।

रामचरित मानस धर्मग्रंथ नहीं है बल्कि तुलसीदास द्वारा स्वयं की खुशी और आनंद के लिए रचित ग्रंथ है-स्वामी प्रसाद

स्वामी प्रसाद मौर्या शुरू से ही मानस की चौपाइयों को लेकर एक वर्ग विशेष और भाजपा पर हमलावर रहे. और उन्होंने इसके जरिए सियासी गोटी बिठाने की भी भरपूर कोशिश की। श्रीरामचरित मानस की चैपाई ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी, सकल तोड़ना के अधिकारी.. का जिक्र करते हुए कहा कि यह धर्मग्रंथ नहीं है बल्कि तुलसीदास द्वारा स्वयं की खुशी और आनंद के लिए रचित ग्रंथ है। इसलिए इसमें जो भी चौपाइयां सामाजिक भेटभाव को बढ़ावा देे रही हैं और नीच-अधम जाति का उल्लेख करते हुए एक बडे़ वर्ग को अपमानित कर रही हैं, उसे हटा दिया जाना चाहिए। कहा कि अगर मोदी-योगी सरकार इसे नहीं हटाती है तो प्रदेश में जैसे ही सपा की सरकार बनेगी, इसे हटा दिया जाएगा। मानस की चौपाई …ढोल, गंवार, शूद्र, पशु नारी… वाली चौपाई के जरिए नारी सम्मान का भी खूब मसला उछाला।

जब तक जिंदा देवियों के मान-सम्मान होता, तबतक शक्ति पूजा के नाम ढोंग बंद हो-स्वामी

साथ ही नवरात्रि में शक्ति पूजा पर सवाल उठाते हुए कि जब तक जिंदा देवियों के मान-सम्मान की रक्षा नहीं शुरू नहीं हो जाती, तब तक शक्ति पूजा के नाम पर होने वाली नौटंकी बंद कर देनी चाहिए। गीता प्रेस गोरखपुर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जैसे ही उन्होंने ताड़ना शब्द पर सवाल उठाया। वैसे ही इसका अर्थ शिक्षा बताते हुए गीता प्रेस ने हजारो नईं प्रतियां छाप डाली।। जबकि पुरानी प्रतियों में ऐसा नहीं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button