अम्बिकापुर

पूर्व डीईओ मनीराम यादव की याचिका पर हाईकोर्ट में जवाब के लिए सरगुजा जेडी प्रभारी अधिकारी ,किंतु भ्रष्टाचार प्रमाणित होने पर भी कार्रवाई न होने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह…?

अंबिकापुर । माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर प्रकरण क्रमांक WPS No. 7568/2026 (मनीराम यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन) में शासन का पक्ष मजबूती से रखने और कानूनी कार्यवाही के प्रभावी संचालन के लिए संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग सरगुजा को ‘प्रभारी अधिकारी’ नियुक्त किया गया है। यह वही प्रकरण है जिसमें बलरामपुर के तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार और खरीदी में अनियमितता के गंभीर आरोप सिद्ध पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें डीईओ पद से हटाकर केवल उनके मूल पद यानी प्राचार्य के पद पर वापस भेज दिया गया था। अपनी इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने न्यायालय का रुख किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उनके विरुद्ध लंबित मामलों के लिए आगामी 16 दिसंबर 2026 की तिथि निर्धारित की गई है। यह आदेश मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी किया गया है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता मनीराम यादव अपने बलरामपुर जिले के पदस्थापना काल के दौरान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत थे, जिनके कार्यकाल के दौरान शासकीय बजट और विभिन्न खरीदी प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। मामलों की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, बलरामपुर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी द्वारा एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसमें अपर कलेक्टर बलरामपुर तथा जिला कोषालय अधिकारी बलरामपुर शामिल थे। संयुक्त जांच समिति द्वारा की गई विस्तृत जांच में पूर्व प्रभारी डीईओ मनीराम यादव द्वारा किए गए वित्तीय भ्रष्टाचार और नियमों के गंभीर उल्लंघनों की पूर्ण पुष्टि हुई थी, जिसमें साइकिल खरीदी, विज्ञान किट, स्टेशनरी और अन्य मदों में करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतानों का खुलासा हुआ था और इसी के आधार पर शासन स्तर पर उनके विरुद्ध यह कार्रवाई की गई थी। इस विभागीय कार्रवाई के खिलाफ याचिकाकर्ता मनीराम यादव द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर याचिका पर अब सुनवाई चल रही है, जिसमें राज्य शासन की ओर से विधिक पक्ष मजबूती से रखने के लिए नियुक्त प्रभारी अधिकारी यानी संयुक्त संचालक सरगुजा को कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभारी अधिकारी याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं का विस्तृत पैरा-वाइज उत्तर तैयार कर शासकीय अधिवक्ता को उपलब्ध कराएंगे और शासकीय अधिवक्ता से समन्वय स्थापित कर तीस दिवस के भीतर न्यायालय में लिखित कथन यानी जवाबदावा प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा, प्रकरण की प्रगति और अद्यतन स्थिति को नियमित रूप से सीसीएमएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है और आदेश में कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि शासकीय अधिवक्ता से समय पर संपर्क नहीं किया जाता है और निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं होता है, तो इसके लिए संबंधित प्रभारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे तथा उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी प्रतियां महाधिवक्ता, प्रमुख सचिव विधि विभाग, कलेक्टर बलरामपुर-सरगुजा, लोक शिक्षण संचालक और संबंधित संयुक्त संचालक को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन हेतु प्रेषित कर दी गई हैं।
इधर, इस बात को लेकर गहरे संदेह और सवाल उठाए जा रहे हैं कि जांच कमेटी द्वारा करोड़ों के भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए जाने के बावजूद आरोपी अधिकारी मनीराम यादव को निलंबित तक नहीं किया गया। उन्हें किसी बड़ी विभागीय या आपराधिक कार्रवाई के दायरे में लाने के बजाय केवल प्रभारी डीईओ के पद से हटाकर उनके मूल पद यानी प्राचार्य के पद पर वापस पोस्टिंग दे देना सीधे तौर पर उन्हें बचाने का एक खुला प्रयास प्रतीत हो रहा है। जानकारों और स्थानीय स्तर पर यह प्रमुखता से चर्चा है कि जब जांच में भ्रष्टाचार के पुख्ता प्रमाण मिल चुके थे, तब शासन या शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें तत्काल निलंबित कर बड़ी कार्रवाई करने या उनके विरुद्ध आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने के बजाय महज पद से हटाकर शांत बैठ जाना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button