कोरबा

दीपका खदान के कांटा बाबू सस्पेंड, प्रबंधन ने थमाया नोटिस, मांगा 3 दिनों में जवाब, एसईसीएल दीपका प्रबंधन मुस्तैद कोल लिफ्टरो में मचा हड़कंप

विनोद शुक्ला हिंद शिखर ब्यूरो कोरबा। एसईसीएल दीपका प्रबंधन इन दिनों नित नए कारणों से सुर्खियों में हैं इस बार एक नए मामले को लेकर दीपिका प्रबंधन ने अपने कोल कर्मचारी और खदान में कार्यरत कांटा बाबू को कोल लिफ्टरों के साथ सांठगांठ के मामले में सस्पेंड कर 3 दिनों के अंदर में जवाब मांगा है इस कार्रवाई से खदान के अंदर कार्यरत कर्मचारी एवं कोल लिफ्टरों मे हड़कंप मची हुई है।
उल्लेखनीय है कि दीपका खदान के कांटा नंबर 1 में कार्यरत कांटा बाबू गणपत प्रसाद को कोल लिफटरो को फायदा पहुंचाना खुद के लिए नुकसान साबित हुआ खदान में कोल ट्रांसपोर्टिंग का कार्य करने वाली तिवरता कोल् ट्रांसपोर्ट कंपनी ने कांटा बाबू को प्रलोभन देकर कम समय में अधिक कोयला लगी वाहनों का कांटा करने पर राजी कर लिया और कांटा बाबू के द्वारा कोल लिफ्टरों को फायदा पहुंचाते हुए गड़बड़ी की गई इसकी सूचना दीपका प्रबंधन को लगते ही अधिकारी हरकत में आए और मामले की गंभीरता देखते हुए रात में ही कांटा बाबू को शो कॉज नोटिस देकर सस्पेंड कर दिया और 3 दिनों के अंदर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
अब देखना यह है कि प्रबंधन खदानों की सुरक्षा और कोयला चोरी को कैसे कंट्रोल करती है प्रबंधन की इस कार्यवाही से कोल लिफ्टरो तालमेल गड़बड़आया नजर आ रहा है अब प्रबंधन अपनी ज्यादा फजीहत कराने के मूड में नहीं दिख रही है। एसईसीएल दीपका प्रबंधन एक्शन मोड में आ चुकी है चाहे कोई भी कर्मचारी हो गड़बड़ी पाए जाने पर निलंबन की जाएगी।यहां कोयला अफरा-तफरी को लेकर हमेशा शिकायतें आती रहती है और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं कई मर्तबा तो ऐसा भी आया है कि यहां सीबीआई टीम की दबिश होने के बावजूद लोग अपनी मनमानी करते नजर आए।

एसईसीएल गेवरा में हुआ वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों का दौरा

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एसईसीएल गेवरा में कॉलोनी मेंटेनेंस का जायजा लेने कोल इंडिया के वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों का गेवरा प्रोजेक्ट की श्रमिक बस्तियों में दौरा किया गया जिसमें साथ में गेवरा प्रोजेक्ट के वेलफेयर मेंबरों की भी उपस्थिति रही।
वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों के द्वारा निरीक्षण कर श्रमिक बस्तियों का जायजा लिया जाता है।लेकिन यह जायजा केवल औपचारिकता ही नजर आती है क्योंकि यहां कर्मचारियों के आवासों में मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए का टेंडर खर्च होने के बावजूद छुटपुट काम नजर आता है और सिविल विभाग के अधिकारियों के द्वारा कर्मचारियों की समस्या को ठीक करना तो दूर उनकी शिकायतो तक का त्वरित संज्ञान नहीं लेते हैं और कुछ ना कुछ स्थिति परिस्थिति का बहाना बनाकर समस्या से पल्ला झाड़ लिया जाता है। वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों के निरीक्षण के दौरान कई कालोनियों के अंदर बहुत सारी अव्यवस्था नजर आई और तो और मकानों के पीछे की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है जिससे जहरीले जीव जंतु अपनी पैठ बना चुके हैं इस पर सिविल विभाग पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है और यहां मजदूर असुविधा के माहौल में जीने को मजबूर हैं यदि इस कोरोनावायरस में इस अव्यवस्था पर त्वरित कार्रवाई नहीं कि जाती है तो कर्मचारी गंभीर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।

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