अम्बिकापुर: प्रतीक्षा बस स्टैंड स्थित तालाब की जमीन को पाटकर अवैध प्लॉटिंग और फर्जीवाड़ा मामले में कलेक्टर के आदेश पर विक्रेता चन्द्रशेखर यादव, क्रेता आजाद इराकी व अन्य पर FIR के निर्देश

अम्बिकापुर: जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की तालाब की भूमि (खसरा नंबर 3714, रकबा 0.250 हेक्टेयर / 0.57 एकड़) को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे गैर-आदिवासियों को बेचने और इसके जल क्षेत्र को पाटकर अवैध रूप से प्लॉटिंग करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरगुजा कलेक्टर ने इस गंभीर प्रकरण में त्वरित संज्ञान लेते हुए तहसीलदार अम्बिकापुर को निर्देशित किया है कि वे मामले में संलिप्त सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित थाने में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं और अविलंब पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से भू-माफियाओं और फर्जीवाड़ा करने वालों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र अम्बिकापुर के मास्टर प्लान-2021 की किताब में यह जमीन नगर निगम के कुल 19 तालाबों की सूची में 5वें नंबर पर दर्ज है, जिसका कुल रकबा 6.25 एकड़ है। आवेदित भूमि का यह पूरा क्षेत्र एक मुकम्मल तालाब के रूप में स्थित है। इस जल स्रोत का उपयोग आसपास के स्थानीय रहवासियों द्वारा निस्तारी, नहाना, धोना, जानवरों को पानी पिलाने और मृत व्यक्तियों के दाह संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2002 में इस जमीन पर छठ घाट का निर्माण भी कराया गया था, जिस पर पारंपरिक रूप से छठ पूजा का आयोजन किया जाता था। स्थानीय निवासियों द्वारा इस बात पर गहरी आपत्ति जताई गई थी कि वंशावली में दर्ज मृतक के वारिसों द्वारा इस जमीन को आजाद इराकी को रजिस्ट्री कर दी गई है, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के भी विपरीत है। इस जल क्षेत्र को पाटकर वहां धड़ल्ले से प्लॉटिंग का कार्य किया जा रहा था।
इन तमाम गंभीर शिकायतों और तथ्यों की पुष्टि के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अम्बिकापुर से विस्तृत जांच कराई गई, जिनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलीं। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, ग्राम अम्बिकापुर स्थित भूमि खसरा नंबर 3714 रकबा 0.231 हेक्टेयर (वास्तविक रकबा 0.57 एकड़, जो वर्ष 1954-55 के पूर्व से जैलाल वल्द बोधन जाति गोंड़ के नाम पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज था) के मूल भूमि स्वामी जैलाल पिता जोधन गोंड के नाम में हेरफेर कर उसे केवल ‘जैलाल पिता बोधन’ दर्शाया गया। इसके बाद फौती नामांतरण कराने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। विक्रेता चन्द्रशेखर यादव (पिता स्व. जगतपाल यादव, जाति बरगाह) एवं क्रेता आजाद इराकी (पिता रियाजुद्दीन इराकी, निवासी जयनगर, तहसील लटोरी, जिला सूरजपुर) द्वारा प्रश्नाधीन भूमि का अवैध अंतरण कराया गया, जबकि यह स्पष्ट रूप से आदिवासी वर्ग की भूमि है जिसे गैर-आदिवासी को फर्जी वारिस बताकर रजिस्टर्ड बैनामा (विक्रय पत्र) निष्पादित किया गया था।
भूमि स्वामी जैलाल पिता बोधन की मृत्यु की तिथि को लेकर भी दस्तावेजों में भारी हेराफेरी की गई। ननकी पिता बोधन के बताए अनुसार जैलाल की मृत्यु 23 अप्रैल 1976 को हुई थी, जबकि चन्द्रशेखर व अन्य द्वारा मृत्यु तिथि 12 अप्रैल 1963 बताकर नामांतरण की मांग की गई। इस संबंध में आयुक्त नगर पालिक निगम अम्बिकापुर ने अपने 4 मई 2026 के पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि जांच में प्रयुक्त मृत्यु पंजीयन (आवेदन संदर्भ क्रमांक 2302011815000288, पंजीयन क्रमांक 2018-15-000292, दिनांक 24.02.2018) नगर पालिक निगम अम्बिकापुर के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है और न ही यह प्रमाण पत्र निगम कार्यालय द्वारा कभी जारी किया गया है। इसके अलावा, अमलभिट्ठी के पटवारी के बयानों से भी यह साबित हुआ कि उनके द्वारा जैलाल पिता देवराम के वारिसानों की जानकारी तैयार की गई थी, लेकिन उस जानकारी का गलत इस्तेमाल जैलाल पिता बोधन के वारिस के रूप में दिखाकर राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण की अवैध कार्रवाई पूरी कराई गई।
जांच रिपोर्ट में इस अवैध कृत्य में कई अन्य लोगों की संलिप्तता भी उजागर हुई है। मुख्य भूमिका निभाने वाले विक्रेता चन्द्रशेखर यादव और क्रेता आजाद इराकी के साथ-साथ वाद भूमि के अन्य सहखातेदार एवं विक्रेतागण—नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा (सभी बच्चे/पिता भोला), जनकुंवर (पत्नी भोला), चन्द्रभान यादव (पिता जगतपाल), और मीरा यादव (पत्नी जगतपाल, सभी निवासी ग्राम अमलभिट्ठी, तहसील लखनपुर)—की भी सीधी संलिप्तता पाई गई है। इन सभी को इस बात की पूरी जानकारी थी कि उनके पूर्वजों की भूमि कहां स्थित है, इसके बावजूद वे ग्राम अम्बिकापुर स्थित प्रश्नाधीन भूमि के मूल खातेदार जैलाल पिता बोधन के फर्जी वारिस बनकर उक्त जमीन का विक्रय गैर-आदिवासी आजाद इराकी को करने में शामिल रहे। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सचिव और सरपंच की भूमिका भी बेहद संदेहास्पद पाई गई, क्योंकि अमलभिट्ठी में असल में जैलाल पिता देवराम (जाति बरगाह) के वारिसान निवास करते हैं, किंतु पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा जैलाल पिता बोधन (जाति गोंड़) का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के उद्देश्य से पंचनामा तैयार करने में सहयोग किया गया।
कलेक्टर सरगुजा द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अधिकार अभिलेख 1954-55 के पूर्व से अनुसूचित जनजाति वर्ग (जैलाल पिता बोधन जाति गोंड़) के नाम दर्ज इस भूमि के अंतरण में छलकपट, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया है। अतः गैर-अनुसूचित जनजाति के क्रेता आजाद इराकी, विक्रेता चन्द्रशेखर यादव तथा अन्य सभी सह-विक्रेताओं (नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चन्द्रभान यादव और मीरा यादव) के विरुद्ध संबंधित थाने में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।





