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पहलगाम के बाद आतंकवादियों की फिर से नापाक हरकत: कुलगाम में नाम पूछकर हिंदू पहचान के चलते छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की हत्या

पहलगाम हमले की खौफनाक यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर वैसी ही बेहद कायराना और नापाक हरकत को अंजाम दिया है। आतंकवादियों ने केलम गांव के एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो निर्दोष प्रवासी श्रमिकों को उनकी हिंदू पहचान और नाम पूछकर गोलियों से भून डाला। इस क्रूर और लक्षित हमले में घायल दोनों मजदूरों ने आखिरकार अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश और शोक की लहर दौड़ गई है।
क्या है पूरा मामला और कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?
यह खौफनाक घटना शुक्रवार देर रात करीब सवा आठ बजे कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र स्थित ईंट भट्ठा-77 पर घटी। रात के सन्नाटे में अचानक दो संदिग्ध आतंकी वहां आ धमके। उन्होंने ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दोनों मजदूरों को घेर लिया और कथित तौर पर उनका नाम पूछकर उनकी हिंदू पहचान सुनिश्चित की। पहचान पुख्ता होते ही आतंकियों ने बिना किसी रहम के बेहद नजदीक से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।
गोलियों की आवाज सुनकर जब तक आसपास मौजूद अन्य सहकर्मी मौके पर पहुंचते, तब तक दोनों श्रमिक खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर चुके थे। आतंकियों ने दोनों को मरा हुआ समझकर मौके से फरार होना ही बेहतर समझा।
अस्पताल पहुंचने पर दोनों श्रमिकों ने तोड़ा दम
आतंकियों के भागने के बाद वहां काम कर रहे अन्य साथियों ने तुरंत साहस जुटाया और स्थानीय लोगों की मदद से लहूलुहान पड़े दोनों मजदूरों को तुरंत अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद छत्तीसगढ़ के पहले श्रमिक दीपक रैट्रे (उम्र 24 वर्ष, पुत्र उमा शंकर) को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए दूसरे श्रमिक भूपिंदर उर्फ भूपेंद्र (उम्र 28 वर्ष, पुत्र दशरथ) को बेहतर इलाज के लिए शुरुआत में जीएमसी और फिर आगे श्रीनगर के स्कीम्स अस्पताल भेजा जा रहा था, लेकिन शनिवार तड़के इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह इस दोहरे आतंकी हमले में दोनों बेकसूर श्रमिकों की जान चली गई।
रोजी-रोटी की तलाश में गए थे कश्मीर, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक दोनों युवा छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और अपने गरीब परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए हजारों किलोमीटर दूर कश्मीर में मजदूरी करने आए थे। वे घटना स्थल के पास ही एक किराए के मकान में रहकर ईंट भट्ठे पर मेहनत-मजदूरी करते थे। इस अंधी हिंसा और लक्षित हत्याओं के बाद से न सिर्फ उनके परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है, बल्कि घाटी में काम कर रहे अन्य प्रवासी श्रमिकों के मन में भी भारी खौफ और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।
सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी:
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और फरार आतंकवादियों की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया जा रहा है।

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