अंबिकापुर: एक महीने में दूसरी बार बाल संप्रेक्षण गृह से भागे 14 अपचारी बालक, 1 को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ा , 13 अब भी फरार

अंबिकापुर । हर के बिशुनपुर में कन्या परिसर रोड पर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) से मंगलवार की रात एक बार फिर 13 अपचारी बालक (कानून से संघर्षरत किशोर) सुरक्षा घेरा तोड़कर भाग निकले। ये सभी बच्चे अलग-अलग अपराधों के मामलों में यहाँ रखे गए थे। मंगलवार की देर शाम, इन बच्चों ने सुधार गृह के अंदर लगे एक पुराने और कमजोर दरवाजे को मिलकर पूरी तरह से तोड़ दिया। दरवाजा टूटते ही कुल 14 बच्चे एक साथ परिसर से बाहर निकल आए। हालांकि, वहां तैनात कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए एक बच्चे को मौके पर ही पकड़ लिया, लेकिन बाकी के 13 बच्चे सुधार गृह की ऊंची बाउंड्री वॉल (अहाता) को फांदकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए। जैसे ही बच्चों के भागने की खबर प्रशासन को मिली, गांधीनगर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल पुलिस की टीमें पूरे इलाके की घेराबंदी कर बच्चों की तलाश कर रही हैं।
इस घटना ने इसलिए सबको हैरान कर दिया है क्योंकि इसी बाल संप्रेक्षण गृह से पिछले एक महीने के भीतर बच्चों के भागने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले, इसी साल 23 जून को भी भारी बारिश के दौरान 13 बच्चे सुधार गृह की खिड़की तोड़कर भाग गए थे। दुखद बात यह है कि पिछले महीने भागे बच्चों में से दो बच्चों का पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है। इतना ही नहीं, इस साल फरवरी के महीने में भी यहां से बच्चों के भागने का मामला सामने आया था। बार-बार हो रही इन घटनाओं से यह साफ हो गया है कि इस सुधार गृह की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है और यहां रहने वाले बच्चों पर नजर रखने में प्रबंधन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
सबसे बड़ी लापरवाही की बात यह है कि जून की घटना के तुरंत बाद जिले के कलेक्टर अजीत वसंत और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राजेश अग्रवाल ने खुद इस बाल संप्रेक्षण गृह का दौरा किया था। उन्होंने वहां की जर्जर व्यवस्था और सुरक्षा में मौजूद भारी कमियों को देखा था और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए इन कमियों को जल्द से जल्द दूर करने के सख्त निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने दावा किया था कि सुरक्षा बढ़ा दी जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि इन निर्देशों पर कोई ठोस काम नहीं किया गया। प्रशासन की इसी ढिलाई का नतीजा रहा कि सुधार गृह के बच्चों को दोबारा भागने का मौका मिल गया और उन्होंने एक महीने के भीतर ही फिर से इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया।
फिलहाल, फरार हुए सभी 13 बच्चों को ढूंढने के लिए पुलिस ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। शहर के सभी रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की टीमें तैनात कर दी गई हैं और आने-जाने वालों की कड़ी तलाशी ली जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस ने फरार हुए बच्चों के माता-पिता और परिजनों से भी संपर्क किया है। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी बच्चा अपने घर पहुंचता है या परिवार के किसी सदस्य से संपर्क करने की कोशिश करता है, तो वे तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दें और बच्चे को वापस बाल संप्रेक्षण गृह लौटने के लिए समझाएं।




