कोरवा पंडो जनजाति के लोग शिक्षा स्वास्थ्य सड़क बिजली पानी सहित शासकीय योजनाओं से वंचित क्षेत्रीय विधायक ने गांव की नही ली सुध मांगे पूरी नहीं होने पर करेंगे आंदोलन आगामी विधानसभा चुनाव को करेंगे बहिष्कार

सरगुजा जिले का एक ऐसा गांव जो 3 गांव के सीमाओं पर बसा हुआ है जहां के कोरवा पंडो जनजाति के ग्रामीण आजादी के 75 वर्ष बाद भी शिक्षा स्वास्थ्य बिजली सड़क पानी सहित शासकीय योजनाओं से वंचित है पूरा मामला लखनपुर विकासखंड के ग्राम ख़िरहिर का है। ग्राम लब्ज़ी रेमहला बड़ा दमाली तीनो ग्रामो के सीमाओं पर बसा ग्राम ख़िरहिर में कोरवा पंडो जनजाति सहित अन्य समुदाय के लगभग 100 परिवार निवासरत है। इस गांव के लोग आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा स्वास्थ्य ,सड़क बिजली पानी जैसे मूलभूत समस्याओं से जूझने को मजबूर है। ग्रामीणों की समस्याओं से शासन प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है। इस आधुनिक युग में आज भी वहां के ग्रामीण ढोढ़ी का पानी पीने मजबूर शिक्षा , स्वास्थ्य, से कोसो दूर, बदहाल सड़के लालटेन युग में जीवन जीने को मजबूर हैं तो वही इस गांव के बच्चों ने स्कूल का मुख तक नहीं देखा है। ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि वर्षों के बाद गांव में खाद्य मंत्री अमरजीत भगत पहुंचे और ग्रामीणों की मांग पूरा करने का आश्वासन दिया जिसमें 7 हैंडपंप खनन कार्य पूर्ण हो चुका है तथा प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कार्य जारी है लेकिन 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी अन्य मांगे पूरी नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है। शासन सत्ता बदलने के बाद भी हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया अगर हमारी जल्द मांग पूरी नही हुई तो आंदोलन करेंगे साथ आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जायेगा।

“””””लालटेन युग जीवन व्यतीत करने मजबूर ग्रामीण”””””
आधुनिक युग में भी ग्राम ख़िरहिर के ग्रामीण लालटेन युग में जीवन व्यतीत करने को मजबूर है। विगत कई वर्षों पूर्व गांव में छोटे छोटे सोलर पैनल लगाया गया था परंतु मेंटेनेंस नहीं होने के कारण वह भी खराब हो गया है। कई बार ग्रामीणों के द्वारा गांव में बिजली व्यवस्था को लेकर जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक मंत्री सहित विधुत विभाग से मांग की परन्तु आज तक इनकी मांग पूरी नही हुई। जिस कारण आज भी ग्रामीण लालटेन युग में जीवन जीने को मजबूर हैं।
“”””ढोढ़ी का पानी बुझा रहे अपनी प्यास”””””
कई वर्षों से ग्रामीण ढोढ़ी का पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। तथा गर्मी का मौसम आते हैं पानी के लिए ग्रामीणों को 5 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।7 हेंडपम्पो की सौगात मिली जिसमे 5 हेण्डपम्प में लाल फ्लोराइड युक्त पानी निकलने से पीने योग्य नही है तो वही एक हेंडपम्प धस जाने तथा एक हेंडपम्प में मशीन नही लगने से उपयोग में नही आ रहा है । जिस कारण आज भी ग्रामीण गांव के मसान झरिया गोबरिया ढोढ़ी, पंडरी पानी ढोढ़ी का पानी पीने विवश है।
बरसात मौसम में ब्लॉक मुख्यालय से कट जाता है गांव
बरसात के मौसम में बदहाल सड़क व नदी पर पुल नहीं होने से ब्लॉक मुख्यालय से कट जाता है। यह गांव। बीमार होने या प्रसव कराने पर चारपाई के माध्यम से 5 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर ग्राम रेमहला आना पड़ता है। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस व महतारी एक्सप्रेस की सुविधा मिलती है। यही नही खाद्यान्न योजना का लाभ लेने ग्रामीणों को पैदल ही सफर करना पड़ता है । मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से सड़क और पुल बनाने की मांग की थी परंतु अब तक मांगे पूरी नहीं हुई है तो वही वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मंत्री जी ने गांव में है खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन दिया था। परंतु 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन पाई। और न ही सड़क व पुल बन सका जिस कारण ग्रामीणों को 5 किमी का पैदल सफर तय कर ग्राम रेमहला खाद्यान्न सामग्री लेने आना पड़ता है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कोरवा पंडो जनजाति के बच्चों ने स्कूल का नहीं देखा मुख
बड़ा दमालि क्षेत्र के ग्राम ख़िरहिर में प्राथमिक पाठशाला किराए के मकान में संचालित होता है। अत्यधिक दूरी होने के कारण गांव के बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। ग्राम ख़िरहिर बस्ती में स्कूल नहीं होने के कारण कोरवा पंडो जनजाति के लगभग 30 परिवार के बच्चे आज तलक स्कूल का मुख नहीं देखे हैं जिस कारण व शिक्षा से वंचित है। कोरवा पंडो जनजाति के लोगों का कहना है हमें भी शिक्षा पाने का अधिकार है हमें भी बेहतर शिक्षा और स्कूल चाहिए।
मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की वैकल्पिक व्यवस्था
लखनपुर के स्थानीय मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज तत्काल दल बल के साथ ग्राम ख़िरहिर पहुंच ग्रामीणों से चर्चा कर आंगनबाड़ी केंद्र का वैकल्पिक व्यवस्था तथा सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को योजनाओं का लाभ शिशुवति माताओं, गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को दिलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना गांव में चाहिए विकास नहीं तो होगा आंदोलन या फिर करेंगे चुनाव का बहिष्कार
ग्रामीणों का कहना है शासन सत्ता बदलने के बाद भी गांव में किसी तरह का कोई विकास कार्य अब तक नहीं हुआ है चुनाव जीतने के बाद विधायक आज तक इस गांव में नहीं आए है। हम सभी ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिक्षा सड़क बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम ख़िरहिर को अलग पंचायत बनाया जाए जिससे गांव का विकास हो सके।अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुई और गांव का विकास नहीं हुआ तो आने वाले समय में गांव के सभी लोग आंदोलन करेंगे या तो फिर आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
लुंड्रा विधायक डॉ प्रीतम राम
लुंड्रा विधायक डॉ प्रीतम राम से फोन से संपर्क करने पर उनके द्वारा कहा गया कि वह यूपी दौरे पर हैं।




