वाहवाही लूटने के चक्कर में समन्यवक द्वारा बच्चों के जान के साथ किया जा रहा खिलवाड़ बच्चों को झाड़ीनुमा खेत में बैठाकर करा रहे अध्यन कार्य, सर्प दंश का बना खतरा कटेन्मेंट जोन से आते कई शिक्षक, संक्रमण का खतरा

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चंद्रिका कुशवाहा
सूरजपुर।. पढ़ई तुंहर पारा है तो बच्चों को पढ़ाने के लिए लेकिन यहां एक स्कूल समन्वयक के दबाव ने बच्चों की जान खतरे में डाल दी है।मामला सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिला अंतर्गत जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर के संकुल केंद्र बुलगांव का है जहां बच्चों को खेतों के बीच बैठ पढ़ना पड़ रहा है और सबसे ज्यादा खतरा बरसात के कारण सांपों से है।बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों को खुश करने के चक्कर में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों को बैठा पढ़ाया जा रहा है जिस कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है।

कोरोना से बचाव के कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले पढ़ई तुंहर द्वार नाम से ऑनलाइन पढ़ाई का कार्यक्रम शुरू किया था ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो,इसका परिणाम ज्यादा असरदार सामने न आने के कारण अब पढ़ई तुंहर पारा नामक कार्यक्रम शुरू किया गया है।इसके तहत शिक्षकों को गांव में जाकर पारा पारा में कक्षाएं लगानी है ताकि बिना भीड़ के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।इसके लिए शिक्षकों को सुरक्षित जगह का चयन करना है लेकिन बच्चों को बैठाने मि ऐसी तस्वीरें सामना रही हैं जिनमें बच्चे बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।ऐसी ही कुछ तस्वीरें बलरामपुर जिला के रामचन्द्रपुर विकासखण्ड के संकुल केन्द्र बुलगांव के स्कूलों की आ रही हैं जहां बच्चों को खेतों के बीच बैठाया जा रहा है और यहां बरसात में सबसे ज्यादा खतरा सांपों से होता है।मिली जानकारी के अनुसार संकुल समन्वयक द्वारा शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है कि वे स्कूल के सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाएं जिस कारण शिक्षकों के पास ऐसी जगहों में बैठाने के अलावा कोई चारा नहीं बच रहा है।शिक्षक बड़ी संख्या में बच्चों को कहीं भी बैठा दे रहे हैं,घास फूस और अगल बगल खाली जमीन में पौधे हों या खेत,वे इस बात की चिंता भी नहीं कर रहे हैं कि वहां सांप,बिछू या अन्य जहरीला कीड़ा निकल सकता है।ये बातें सामने आ रही हैं कि एक साथ सभी बच्चों को पढ़ाने के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है नहीं तो कम बच्चों को कहीं भी सुरक्षित तरीके से बैठाकर पढ़ाया जा सकता है।बरहाल जो तस्वीरें सामने आईं हैं उनमें बच्चे कहीं भी सुरक्षित नहीं है,कहा जा रहा है कि उच्च अधिकारियों को खुश करने की लालसा में इस तरह की स्थिति बनाई जा रही है,शिक्षकों के साथ स्कूल समन्वयक पर नियंत्रण नहीं किया गया तो कभी भी कोई दुर्घटना घट सकती है।

सुरक्षित जगह पर भी हो सकती है पढ़ाई…

शासन की मंशा है कि पढ़ई तुंहर पारा के तहत बच्चों को पारा पारा में जाकर पढ़ाया जाए,वैसे भी एक पारा में बच्चों की संख्या ज्यादा नही होती है और किसी के घर,आंगन में आराम से बैठाकर पढ़ाया जा सकता है जो पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।लेकिन यहां जान बूझकर भीड़ में बच्चों को ऐसी जगहों पर बैठाया जा रहा है जो खतरनाक है।

कंटेन्मेंट जोन से आते हैं कई शिक्षक,कोरोना का खतरा…

बच्चों को खेतों या अन्य जगहों पर बैठाकर पढ़ाना तो खतरनाक है ही,बताया जा रहा है कि यहां बहुत से शिक्षक ऐसी जगहों से आते हैं जो कंटेन्मेंट जोन है।इस लिहाज से कोरोना का डर भी इन बच्चो के बीच हो सकता है।बताया जा रहा है कि उक्त शिक्षक आसपास न रहकर अम्बिकापुर जैसी जगहों से आते हैं।

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