ट्रांसफर के लिए आरएमए से 1 लाख लेकर फर्जी ट्रांसफर आदेश देने वाले भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं जिला महामंत्री समेत चार हुए गिरफ्तार

स्वास्थ्य विभाग में एक कर्मचारी के स्थानांतरण के एवज में ₹1 लाख की ऑनलाइन रिश्वत लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने जिला भाजपा उपाध्यक्ष व जिला भाजपा महामंत्री समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
रोहांसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक (RMA) करण कुमार देवांगन का स्थानांतरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से मोपर स्वास्थ्य केंद्र किए जाने का एक फर्जी आदेश तैयार किया गया था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ था और दस्तावेज पर फर्जी आदेश क्रमांक व 14 अगस्त की तारीख दर्ज थी। मामला सामने आने पर पलारी के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. पंकज वर्मा द्वारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद जांच में स्पष्ट हुआ कि राज्य संवर्ग के कर्मचारियों के स्थानांतरण का अधिकार केवल राज्य शासन के पास है और उस समय स्थानांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध भी था।
पलारी पुलिस ने मामले में कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन, कसडोल के आरएमए रवि कुमार सेन, गिरौदपुरी के पूर्व सरपंच व जिला भाजपा उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल और जिला भाजपा महामंत्री कृष्णा अवस्थी शामिल हैं। पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है कि इस पूरे कार्य के लिए यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन द्वारा पैसे का लेनदेन किया गया था, जिसमें मुख्य रूप से कृष्णा अवस्थी पर ₹1 लाख की मांग करने और पुनीराम पटेल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान लेने का आरोप है। इसके बाद आरोपी ने सीएमएचओ के जाली हस्ताक्षर वाला ट्रांसफर ऑर्डर तैयार करवाकर व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा था, जिसके आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की है।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक स्तर पर भी कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, और भारतीय जनता पार्टी संगठन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला भाजपा महामंत्री कृष्णा अवस्थी तथा जिला भाजपा उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल को उनके संगठनात्मक दायित्वों से तुरंत मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही, आरोपी भाजपा पदाधिकारी की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर बड़े नेताओं के साथ साझा की गई तस्वीरें भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं और पुलिस इस पूरे प्रकरण में डिजिटल व ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन तथा इस फर्जी रैकेट में शामिल अन्य संभावित चेहरों की गहराई से जांच कर रही है।




