देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद के माता-पिता बदहाली में जीने को मजबूर,अनुकंपा नियुक्ति और मुआवजा मिलने के बाद शहीद की पत्नी ने किया घर से बेदखल…

लखनपुर । देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों का सम्मान समाज और राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन सरगुजा जिले से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद रमाशंकर सिंह के माता-पिता आज अपनों की बेरुखी और बदहाली के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं।
ग्राम अमदला (लखनपुर विकासखंड) के रहने वाले शहीद रमाशंकर सिंह के माता-पिता और उनके भाई ने शहीद की पत्नी विस्तुरी सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि जिस बेटे ने देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, आज उसी के माता-पिता दो वक्त की रोटी और अपने हक के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं।
मुआवजा और अनुकंपा के बादमुंह मोड़ने का आरोप
परिजनों के अनुसार, शहीद रमाशंकर सिंह की शहादत के बाद शासन की तरफ से परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में मुआवजा राशि प्रदान की गई थी। इसके साथ ही, शहीद की पत्नी विस्तुरी सिंह को अनुकंपा नियुक्ति भी मिली।
शुरुआती दौर में यह उम्मीद जताई गई थी कि यह सहायता पूरे परिवार का संबल बनेगी और माता-पिता की बुढ़ापे की लाठी बनेगी। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि सरकारी लाभ और नौकरी मिलने के कुछ समय बाद ही शहीद की पत्नी ने परिवार से पूरी तरह दूरी बना ली। आरोप है कि उन्होंने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने से इंकार कर दिया और उन्हें उनके ही घर से बेदखल कर दिया।
न्याय के लिए प्रशासनिक दरवाजों पर दस्तक
परिवार का कहना है कि आर्थिक तंगी और बेघर होने के कारण उनका जीवन नर्क बन गया है। इस कठिन परिस्थिति से जूझते हुए अब उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है। परिजनों ने मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय और स्थानीय सुशासन तिहार (जन समस्या निवारण) शिविर में दर्ज कराई है। उनकी मांग है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाए, ताकि शहीद के माता-पिता को सम्मानजनक जीवन मिल सके।
शहीद की पत्नी का पक्ष
इस पूरे मामले में जब शहीद की पत्नी विस्तुरी सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने दो दिन बाद अपनी बात रखने की बात कही थी। हालांकि, निर्धारित समय के बाद जब दोबारा फोन किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।




