भारतीय उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव: ‘विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल’ को कैबिनेट की मंजूरी, UGC, AICTE और NCTE की जगह लेगा एक एकल नियामक

हिन्द शिखर समाचार । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे में एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव को हरी झंडी दे दी है। बुधवार को कैबिनेट ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल’ को मंजूरी दी, जो देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक सिंगल ओवरआर्चिंग रेगुलेटर (एकल व्यापक नियामक) स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह नया निकाय मौजूदा प्रमुख नियामक संस्थाओं जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) की जगह लेगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रमुख लक्ष्यों में से एक को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
प्रस्तावित कानून, जिसे पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल कहा जा रहा था, अब ‘विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल’ के नाम से जाना जाएगा। “विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण स्थापित करने वाले बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।” इस सुधार का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा प्रणाली में मौजूदा विखंडित नियामक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना, नियामक दोहराव को समाप्त करना, और शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता एवं अकादमिक स्वायत्तता को बढ़ावा देना है।
नए कमीशन के मुख्य रूप से तीन कार्य होंगे—
रेगुलेशन (विनियमन), एक्रेडिटेशन (मान्यता) और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड (पेशेवर मानक) तय करना। ये तीन कार्य उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना, उनकी गुणवत्ता जांच और शैक्षणिक रूपरेखा तय करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, फंडिंग (वित्तीय अनुदान) को, जिसे अक्सर चौथा वर्टीकल माना जाता है, उसे नियामक के दायरे से बाहर रखा गया है। यह प्रावधान है कि फंडिंग से संबंधित स्वायत्तता प्रशासनिक मंत्रालय यानी शिक्षा मंत्रालय के पास ही रहेगी।
यह नया कमीशन NEP 2020 में सुझाए गए व्यापक नियामक ढांचे का पालन करेगा। NEP में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उच्च शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नियामक प्रणाली में पूर्ण बदलाव की आवश्यकता है, ताकि रेगुलेशन, एक्रेडिटेशन, फंडिंग और एकेडमिक स्टैंडर्ड तय करने जैसे अलग-अलग कार्य, अलग-अलग, आजाद और मजबूत संस्थाओं द्वारा किए जाएं। इस प्रस्तावित ढांचे में चार वर्टीकल शामिल होने की संभावना है: नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी काउंसिल (NHERC) जो प्राइमरी रेगुलेटर होगा, नेशनल एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAC) जो गुणवत्ता बेंचमार्क तय करेगा, जनरल एजुकेशन काउंसिल (GEC) जो एकेडमिक फ्रेमवर्क बनाएगा, और हायर एजुकेशन ग्रांट्स काउंसिल (HEGC) जो फंडिंग के नियमों की देखरेख करेगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह नया कमीशन मेडिकल और लॉ कॉलेज को अपने दायरे में नहीं लाएगा। इन विशिष्ट क्षेत्रों के नियामक निकाय पहले की तरह ही कार्य करते रहेंगे। इस एकल नियामक को स्थापित करने का विचार नया नहीं है; वर्ष 2018 में भी UGC एक्ट को समाप्त करने और HECI की स्थापना के लिए एक ड्राफ्ट बिल पब्लिक रिव्यू के लिए पेश किया गया था, हालांकि वह आगे नहीं बढ़ पाया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में वर्ष 2021 से इस लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार को फिर से गति मिली और अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ यह संसद में पेश होने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि यह बिल भारतीय उच्च शिक्षा के प्रशासन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और गुणवत्ता-केंद्रित बनाकर छात्रों को लाभान्वित करेगा।





