छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं के प्राचार्य प्रमोशन का रास्ता साफ

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं (Lecturers) के प्राचार्य (प्रिंसिपल) पद पर पदोन्नति को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने पदोन्नति पर लगी रोक को हटाते हुए राज्य सरकार की नीति और तय किए गए नियमों को पूरी तरह से वैध ठहराया है।
यह मामला हाई कोर्ट में काफी जटिल हो गया था क्योंकि कई शिक्षकों और संगठनों ने अलग-अलग आधारों पर याचिकाएं दायर कर रखी थीं। शिक्षक अखिलेश त्रिपाठी की याचिका सहित अन्य मामलों पर सुनवाई के दौरान, यह सामने आया कि यह विषय विभिन्न बेंचों में लंबित था। इस स्थिति को देखते हुए, अतिरिक्त महाधिवक्ता के अनुरोध पर कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को मिलाकर सुनवाई की जाए।”
सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ ‘क्लब’ कर संयुक्त सुनवाई करने का निर्णय लिया। इन याचिकाओं में 2019 के नियम और 2025 की पदोन्नति सूची से जुड़े मामले शामिल थे।
इस मामले में कोर्ट और सरकार के बीच एक बड़ा मोड़ तब आया जब 28 मार्च 2025 को हुई पिछली सुनवाई में, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को यह आश्वासन दिया गया था कि अगली सुनवाई तक कोई नया पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
बावजूद इसके, सरकार ने 30 अप्रैल को पदोन्नति सूची जारी कर दी। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने 1 मई को इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
याचिकाकर्ताओ ने मुख्य रूप से दो आपत्तियां उठाई थीं:
शैक्षणिक योग्यता विवाद: उनका तर्क था कि प्रशासनिक पद होने के कारण प्राचार्य पदोन्नति के लिए केवल B.Ed डिग्री धारकों को ही पात्र माना जाए और D.L.Ed (डिप्लोमा) धारकों को अयोग्य घोषित किया जाए।
सरकारी आश्वासन का उल्लंघन: कोर्ट को आश्वस्त करने के बाद भी सूची जारी करना।
कोर्ट का अंतिम निर्णय और शिक्षकों को राहत
मामले में इंटरविनर अधिवक्ता अनूप मजूमदार सहित सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस रविंद्र कुमार ने फैसला सुरक्षित रखा। बाद में डिवीजन बेंच (जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र कुमार प्रसाद) ने यह अंतिम और निर्णायक फैसला सुनाया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने B.Ed और D.L.Ed दोनों तरह की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले व्याख्याताओं को प्राचार्य पदोन्नति के लिए पात्र मानने के नियम को भी सही ठहराया।
इस फैसले से ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं को बड़ी राहत मिली है। अब कानूनी बाधा समाप्त होने के बाद, स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही इन पदोन्नत शिक्षकों की प्राचार्य पद पर पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू करेगा।

