अपने ही साफ्टवेयर कर्मचारियों के लाखो की ठगी का शिकार हुआ शक्कर कारखाना….जांच प्रतिवेदन को लेकर आशंका.. प्रबंधन ने कहा सौंप दिया जांच प्रतिवेदन….चौकी प्रभारी ने कहा नही मिली जांच रिपोर्ट.. मामले को दबाने किया जा रहा प्रयास

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प्रतापपुर/अम्बिकापुर।मां महामाया शक्कर कारखाने में फर्जी गन्ना तौल का मामला पहले कई बार अखबारों में उजागर हो चूका है परंतु मामला कारखाना प्रबंधन व पुलिस के बीच उलझ कर रह गई है।इस संबंध में प्रबंधन का कहना है कि हमने जांच प्रतिवेदन की कॉपी अग्रिम कार्यवाही के लिए पुलिस को सौंप दिया है जबकि पुलिस प्रतिवेदन को लेकर अनभिज्ञ है।
विगत 4 माह होने को है पर अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।इतना बड़ा मामला जांच के अभाव में ठंडे बस्ते में है।सूत्रों की माने तो मामले को दबाने का भी प्रयास किया जा रहा है।इस कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह के चर्चाएं व्याप्त है

विदित हो कि मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना केरता में गन्ना खरीदी, पर्ची वितरण एवं कृषकों का भुगतान एवं अन्य लेखा संबंधी कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से प्रबंधन ने लाखों रुपए खर्च कर सॉफ्टवेयर लगवाया परंतु अपने ही सॉफ्टवेयर कर्मचारियों पर अंधविश्वास का नतीजा यह हुआ कि कंप्यूटर विभाग के कर्मचारी ही फर्जी गन्ने की तौल कर कारखाना, शेयर धारकों एवं गन्ना कृषकों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। आनन-फानन में जब मामला प्रकाश में आया तब प्रबंधन ने जांच कमेटी गठित कर कार्रवाई के तौर पर मात्र एक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया जबकि मुख्य कम्प्यूटर प्रभारी के ऊपर इस मामले में किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न करना एक नए संदेह को जन्म देता है।क्योंकि बिना मुख्य कम्प्यूटर ऑपरेटर के बगैर जानकारी के इतना बड़ा कदम सहायक कम्प्यूटर ऑपरेटर नहीं उठा सकता है व इस जिम्मेदारी से मुख्य कम्प्यूटर ऑपरेटर अपने को अलग नहीं कर सकता।

मामले में प्रबंधन द्वारा जांच कमेटी बैठाकर तौल संबंधित जांच कराई गई परन्तु पिकअप वाले मामले के अलावा और किसी प्रकार का जांच नहीं कराया गया जबकि यह मामला लाखों का फर्जीवाड़ा हुआ है।विश्वशस सूत्रों से पता चला है कि जांच कमेटी के द्वारा जांच उपरांत अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन खड़गवां चौकी को सौंप दिया गया है।जबकि पुलिस प्रतिवेदन को लेकर अनभिज्ञ है पुलिस को किसी प्रकार का इस सम्बंध में कोई जानकारी नहीं है।यह मामला कारखाना प्रबंधन व जांच कमेटी के बीच मे लटककर रह गई है।जिससे लोगों में तरह-तरह के कारखाना के प्रति नए नए संदेह उतपन्न हो रहें।
एक ओर जहां पूरे देश में डिजिटल इंडिया का अभियान चल रहा है वहीं दूसरी ओर शक्कर कारखाना के कंप्यूटर विभाग के कर्मचारी इस अभियान की मिट्टी पलीत करने में लगे हुए हैं। अब देखना यह है कि उक्त मामले में दोषियों के विरुद्ध कारखाना द्वारा कार्रवाई कब तक हो पाती है।

इस संबंध में मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना केरता के अध्यक्ष विद्यासागर सिंह से चर्चा करने पर उन्होंने बताया

“हमारे संचालक मंडल द्वारा पूरे मामले की जांच कर ली गई है जिसमें एक गार्ड सहित अन्य 4 लोग दोषी पाए गए।जिसके बाद संचालन समिति द्वारा उन्हें कारखाने से बर्खास्त कर दिया।हमने अपने स्तर से जांच पूर्ण कर लिया परंतु खड़गवां पुलिस को इसी मामले में अलग से शिकायत की गई थी जिससे उनके द्वारा हमारे यहां से जांच प्रतिवेदन की कॉपी मंगाई गई थी जो हमारे यहां से 1 माह पूर्व ही जांच प्रतिवेदन दे दी गई है।”

इस संबंध में खड़गावां चौकी प्रभारी विमलेश सिंह का कहना है कि

“हमें अब तक शक्कर कारखाने से कोई भी जांच प्रतिवेदन नहीं मिला है।”

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