संघर्षों की जीत: सिलाई गुमटी संचालक की मेधावी बेटी प्रीति ने 93.71 परसेंटाइल के साथ उत्तीर्ण की पिता की प्रेरणा से हासिल किया मुकाम


अम्बिकापुर: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो गरीबी कभी सफलता के आड़े नहीं आती। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है अम्बिकापुर की सुश्री प्रीति रवि ने। प्रीति ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC NET) में 93.71 परसेंटाइल हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए हुईं क्वालीफाई
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी परिणामों में प्रीति ने ‘कंप्यूटर साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन’ विषय में शानदार प्रदर्शन किया। इस सफलता के साथ ही प्रीति अब विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए शैक्षणिक रूप से पात्र हो गई हैं, साथ ही उन्होंने पीएचडी के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है।
पिता की सिलाई की गुमटी और प्रीति का संघर्ष
प्रीति के घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी अपनी गरीबी को सपनों के आड़े नहीं आने दिया। उनके पिता, श्री राजदेव रवि, शहर के स्कूल रोड में एक छोटी सी सिलाई की गुमटी चलाते हैं। इसी छोटी सी दुकान की सीमित कमाई से उन्होंने न सिर्फ घर का खर्च चलाया, बल्कि अपनी बेटी की शिक्षा में भी कोई कमी नहीं रहने दी।
पिता की मेहनत बनी प्रेरणा
अपनी इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए प्रीति ने बताया कि उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत उनके पिता हैं। प्रीति के अनुसार, “मैंने अपने पिता को कड़ी धूप और मुश्किल परिस्थितियों में छोटी सी गुमटी में मेहनत करते देखा है, उन्हीं के परिश्रम को देखकर मुझे प्रेरणा मिली कि मैं पढ़-लिखकर उनका नाम रोशन करूँ।” प्रीति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के त्याग और अपने गुरुजनों द्वारा दी गई गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को दिया है।
प्रीति की इस सफलता से क्षेत्र के छात्रों में हर्ष का माहौल है और यह उन सभी बच्चों के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं।





