SIR अपडेट: तमिलनाडु में 97 लाख, बंगाल में 58 लाख और छत्तीसगढ़ में 27 लाख नाम कटे, अब यूपी के आंकड़ों का इंतज़ार..

शनई दिल्ली | आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है। विपक्ष के भारी विरोध और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच आयोग ने कई राज्यों में डेटा शुद्धिकरण का काम पूरा कर लिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची से करोड़ों फर्जी और दोहरे नाम हटाए गए हैं, जिसमें तमिलनाडु फिलहाल सबसे आगे है।
तमिलनाडु में रिकॉर्ड 97 लाख नाम हटाए गए ,आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है, जहां मतदाता सूची से 97 लाख नाम काटे गए हैं। वहीं, पश्चिमी राज्य गुजरात में 73 लाख और पश्चिम बंगाल में 58 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बंगाल की तुलना में गुजरात में ‘डबल वोटर’ (एक ही व्यक्ति का दो जगह नाम) अधिक पाए गए। गुजरात में 3.81 लाख डबल वोटर मिले, जबकि बंगाल में यह संख्या 1.38 लाख रही।
उत्तर प्रदेश पर टिकी सबकी नजरें
हालांकि अभी तमिलनाडु पहले नंबर पर है, लेकिन माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश इस आंकड़े को पीछे छोड़ सकता है। यूपी में अभी SIR की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व में दावा किया था कि प्रदेश में लगभग चार करोड़ वोटर ‘गायब’ या संदिग्ध हैं। यूपी के अंतिम आंकड़े 31 दिसंबर को जारी किए जाएंगे, जो चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं।
राज्यवार आंकड़ों पर एक नजर (वोटर लिस्ट से कटे नाम)
नीचे दी गई तालिका उन राज्यों की स्थिति दर्शाती है जहां शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं:
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश हटाए गए मतदाताओं की संख्या
तमिलनाडु 97 लाख
गुजरात 73 लाख
पश्चिम बंगाल 58 लाख
बिहार 47 लाख
मध्य प्रदेश 42 लाख
छत्तीसगढ़ 27 लाख
केरल 22 लाख
गोवा 1.02 लाख
पुडुचेरी 84 हजार
अंडमान 22 हजार
क्यों हटाए जा रहे हैं नाम?
चुनाव आयोग के अनुसार, इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची से निम्नलिखित त्रुटियों को दूर करना है:
मृत मतदाता: जिनके नाम अभी भी सूची में दर्ज थे।
डुप्लीकेट एंट्री: एक ही वोटर का दो अलग-अलग बूथों या विधानसभाओं में नाम होना।
स्थायी पलायन: ऐसे लोग जो अब उस पते पर नहीं रहते।
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मतदाता सूची में सुधार की यह लहर देश के विभिन्न हिस्सों में समान रूप से प्रभावी रही है। गुजरात में जहाँ 73 लाख नाम हटाए गए, वहीं पश्चिम बंगाल में 58 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए। दिलचस्प तथ्य यह है कि बंगाल की तुलना में गुजरात में दोहरे मतदाताओं (डबल वोटर) की संख्या अधिक पाई गई। गुजरात में जहाँ 3.81 लाख डबल वोटर मिले, वहीं बंगाल में यह संख्या 1.38 लाख रही। इसी तरह बिहार में 47 लाख, मध्य प्रदेश में 42 लाख, छत्तीसगढ़ में 27 लाख और केरल में 22 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी यह प्रक्रिया प्रभावी रही, जिसमें गोवा से 1.02 लाख, पुडुचेरी से 84 हजार और अंडमान से 22 हजार नाम कम हुए हैं।
कब आएगी फाइनल लिस्ट?
विपक्ष इस प्रक्रिया की टाइमिंग और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक निष्पक्ष चुनाव के लिए अनिवार्य कदम है। SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संशोधित और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फरवरी, 2026 को किया जाएगा।





