रायगढ

रायगढ़ में भीषण बवाल: जिंदल की कोल माइंस के खिलाफ आगजनी और पथराव, महिला टीआई लहूलुहान, फूंकी गईं कई गाड़ियां…

रायगढ़ । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल माइंस का विरोध शनिवार को खूनी संघर्ष और भीषण आगजनी में तब्दील हो गया। तमनार ब्लॉक के धौराभाठा में भू-अधिग्रहण के खिलाफ डटे ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने मौके पर खड़ी बस और कई अन्य गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते पूरा इलाका धुएं के गुबार और चीख-पुकार से भर गया। जब पुलिस बल ने हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने और आगजनी रोकने की कोशिश की, तो ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में ड्यूटी पर तैनात महिला टीआई कमला पुसाम बुरी तरह घायल हो गईं। उनके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं, जिसके बाद उन्हें अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जिंदल प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ यह आक्रोश पिछले कई दिनों से सुलग रहा था, जो आज विस्फोट के रूप में सामने आया। 14 गांवों के हजारों ग्रामीण अपनी जमीन बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने न केवल वाहनों में तोड़फोड़ की, बल्कि पुलिस और प्रशासन की टीम को खदेड़ने के लिए गुलेल और पत्थरों का इस्तेमाल किया। घटना की सूचना मिलते ही लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों के सुर में सुर मिलाते हुए जनसुनवाई रद्द करने की मांग की। विधायक की मौजूदगी में ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर संकल्प लिया कि वे अपनी जमीन जिंदल समूह को नहीं देंगे।
वर्तमान में धौराभाठा और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। गाड़ियों से उठती आग की लपटें और सड़कों पर बिखरे पत्थर इस हिंसक टकराव की गवाही दे रहे हैं। प्रशासन ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। कोरबा और सरगुजा के बाद अब रायगढ़ में हुई इस भीषण हिंसा ने स्पष्ट कर दिया है कि कोयला खनन को लेकर प्रदेश में जन-आक्रोश चरम पर है। पुलिस प्रशासन अब उपद्रवियों की पहचान करने और स्थिति को शांत करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन ग्रामीणों का रुख अब भी बेहद कड़ा बना हुआ है।

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