जशपुर

‘मर्डर’ की गुत्थी बनी पहेली: जिस लाश की पहचान मां-पत्नी ने की और हत्या के आरोप में 4 दोस्त जेल पहुंचे, वह युवक जिंदा लौटा,क्या पुलिसिया खौफ में बेगुनाहों ने मजिस्ट्रेट के सामने कबूला था झूठा गुनाह?

जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कानून और न्याय व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं है। सिटी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पुरनानगर में मिली एक अधजली लाश के मामले में पुलिस की पूरी जांच और आरोपियों का कबूलनामा तब ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जब ‘मृतक’ घोषित किया गया युवक सीमित खाखा अचानक जीवित होकर अपने घर पहुंच गया। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर और संदिग्ध हो गया है क्योंकि जिस युवक की हत्या के आरोप में चार लोग फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं, उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने खुद को कातिल स्वीकार किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पुलिस ने किस दबाव या डर के दम पर बेगुनाहों से यह झूठा कबूलनामा करवाया?
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 18 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब तुरीटोंगरी के एक गड्ढे में एक युवक का जला हुआ शव मिला था। शव की शिनाख्त के लिए जब ग्राम सीटोंगा के सीमित खाखा के परिजनों को बुलाया गया, तो उसकी मां, पत्नी और भाई ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव की पहचान सीमित खाखा के रूप में की। पुलिस ने इस पहचान को अंतिम मानते हुए हत्या का मामला दर्ज किया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गांव के ही चार युवकों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब इन चारों आरोपियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर यह बयान दिया कि उन्होंने ही सीमित की हत्या की है। आरोपियों के इस ‘इकबालिया बयान’ के बाद पुलिस ने केस सुलझाने की पीठ थपथपाई और चारों को जेल भेज दिया।
लेकिन कानून की यह पूरी प्रक्रिया उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब ‘मृतक’ सीमित खाखा झारखंड के हजारीबाग से मजदूरी कर सकुशल अपने गांव सिटोंगा लौट आया। उसे जिंदा देख परिजनों की खुशी से ज्यादा पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई। अब सबसे बड़ा संदेह आरोपियों के जेल जाने और उनके कबूलनामे को लेकर है। चर्चा जोरों पर है कि क्या पुलिस ने इन युवकों को इस कदर मारा-पीटा या डराया था कि उन्होंने जेल जाना बेहतर समझा और वह जुर्म स्वीकार कर लिया जो कभी हुआ ही नहीं था? यह सीधे तौर पर पुलिसिया कार्यप्रणाली और जांच की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि आखिर बिना किसी ठोस सबूत के कैसे बेगुनाहों को कातिल बनाकर जेल भेज दिया गया।
इस बड़ी लापरवाही के उजागर होने के बाद जशपुर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया है। पुलिस अब उन चार युवकों को जेल से रिहा कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रही है। हालांकि, इस घटना ने जिले में हड़कंप मचा दिया है और अब पुलिस के सामने दो नई चुनौतियां हैं—पहला, वह अधजला शव किसका था जिसकी हत्या हुई? और दूसरा, उन बेगुनाहों के साथ हुए अन्याय और गलत जांच की जिम्मेदारी किसकी है? फिलहाल पुलिस असली मृतक की तलाश में जुट गई है, लेकिन इस मामले ने खाकी की कार्यशैली पर गहरी कालिख पोत दी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button