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छत्तीसगढ़ में रेल अवसंरचना को नई रफ़्तार: अंबिकापुर क्षेत्र के लिए कई नई रेल लाइन परियोजनाएँ तेज़

अंबिकापुर । अंबिकापुर तथा छत्तीसगढ़ क्षेत्र में रेल संपर्क को सुदृढ़ बनाने हेतु भारत सरकार द्वारा हाल के वर्षों में रेल परियोजनाओं को अभूतपूर्व गति प्रदान की जा रही है। यह जानकारी आज लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी।
मंत्री ने बताया कि यह प्रश्न सांसद चिन्तामणि महाराज द्वारा पूछा गया था। अंबिकापुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल में कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण एवं परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं। बोरिडांड–अंबिकापुर (सुरजपुर) दोहरीकरण परियोजना (80 किमी) पर कार्य आरंभ किया जा चुका है। अंबिकापुर–रामानुजगंज–बरवाडीह नई रेल लाइन तथा रामानुजगंज–गढ़वा रोड सहायक लाइन (262 किमी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। इसी प्रकार सरडेगा–पत्थलगांव–अंबिकापुर नई रेल लाइन (218 किमी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी पूर्ण कर ली गई है।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए रेल बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2009–14 के दौरान जहाँ औसत वार्षिक आवंटन 311 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025–26 में यह बढ़कर 6,925 करोड़ रुपये हो गया है—जो 22 गुना से अधिक वृद्धि दर्शाता है।
नया रेल लाइनों का कमीशनिंग भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है। वर्ष 2009–14 के दौरान केवल 32 किमी (औसत 6.4 किमी/वर्ष) रेल लाइनें कमीशन की गई थीं, जबकि वर्ष 2014–25 के दौरान 1,189 किमी (औसत 108.1 किमी/वर्ष) रेल लाइनें कमीशन की गईं—जो 15 गुना से अधिक वृद्धि है।
01 अप्रैल 2025 की स्थिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य में आंशिक या पूर्ण रूप से स्थित कुल 26 रेल परियोजनाएँ (06 नई लाइनें और 20 दोहरीकरण/मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ) 1,931 किमी लंबाई एवं 31,619 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 1,023 किमी लंबाई का कमीशनिंग पूर्ण किया जा चुका है तथा मार्च 2025 तक 16,325 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में अंबिकापुर क्षेत्र सहित पिछले तीन वर्षों तथा चालू वित्त वर्ष (2022–23, 2023–24, 2024–25 एवं 2025–26) में कुल 26 सर्वेक्षणों को, कुल 3,901 किमी लंबाई को कवर करते हुए, स्वीकृति प्रदान की गई है।
श्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि किसी भी रेल परियोजना की स्वीकृति यातायात पूर्वानुमान, लाभप्रदता, पहली–अंतिम मील कनेक्टिविटी, अपूर्ण कड़ियों को जोड़ना, मार्ग विस्तार, राज्य सरकारों एवं जनप्रतिनिधियों की माँगें, रेलवे की परिचालन आवश्यकताएँ तथा सामाजिक–आर्थिक महत्व जैसे मानदंडों पर आधारित होती है।
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के पूर्ण होने का समय भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, जनोपयोगी सुविधाओं के स्थानांतरण, सांविधिक अनुमतियाँ, स्थानीय स्थलाकृति, कानून-व्यवस्था तथा मौसम आधारित कार्य-दिवस जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
सरकार ने आश्वस्त किया है कि अंबिकापुर क्षेत्र से संबंधित सभी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है एवं इनके त्वरित कार्यान्वयन हेतु निरंतर प्रयास जारी रहेंगे ।

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