13 लाख कहाँ गए? ट्रक ड्राइवर की ‘लूट’ की कहानी पर उठे सवाल; चोट के निशान नहीं, गीले कपड़े नहीं, पुलिस ने पलटा जांच का रुख

जशपुर (छत्तीसगढ़): जशपुर जिले के बालाछापर हाइवे पर मंगलवार सुबह एक ट्रक ड्राइवर से 13 लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन लूटे जाने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस टीम की प्रारंभिक जांच और ड्राइवर के बयान में आए गंभीर विरोधाभासों के कारण अब इस पूरी घटना की सच्चाई और खुद ड्राइवर की भूमिका पर संदेह गहरा गया है।
ड्राइवर का दावा: लघुशंका के लिए रुकने पर हुई लूट
रांची से माल खाली कर और आलू लोड कर आ रहे ट्रक क्रमांक CG14-MT-6190 के चालक ने पुलिस को बताया कि वह सुबह लगभग 06:00 बजे बालाछापर के पास लघु शंका के लिए ट्रक रोककर नीचे उतरा था। इसी दौरान, पीछे से आई एक चार पहिया गाड़ी से चार अज्ञात लोग उतरे। ड्राइवर के अनुसार, उन लोगों ने उसके हाथ-पैर बांधकर उसे जमीन पर गिरा दिया, डंडे और पत्थर से चोट पहुंचाई, और फिर गाड़ी में रखे ₹13 लाख नकद तथा उसका मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। हालांकि, लूटा गया मोबाइल फोन बाद में डोडकचौरा ढाबा के पास गिरा मिला।
पुलिस जांच: ड्राइवर के कथन में गंभीर संदेह
पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्राइवर का मेडिकल मुलाहिजा कराया और बयान दर्ज किए, जिसके बाद लूट की कहानी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस विवेचना का एक महत्वपूर्ण एंगल अब ड्राइवर की संदेहास्पद भूमिका पर केंद्रित हो गया है:
चोट के निशान नदारद: ड्राइवर ने हाथ बांधने, पैर में डंडे से और कमर पर पत्थर से प्रहार किए जाने की बात कही थी, जबकि उसके मेडिकल मुलाहिजा रिपोर्ट में कहीं भी चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं।
बांधने के निशान का अभाव: ड्राइवर ने हाथ बांधे जाने का दावा किया, लेकिन उसके हाथ में बांधने के कोई निशान नहीं पाए गए। इसके अलावा, वह बार-बार हाथ बांधने की दिशा (कभी आगे, कभी पीछे) को लेकर भी अपने बयान बदल रहा है।
कपड़े सूखे और साफ: ड्राइवर के अनुसार, लुटेरों ने उसे सुबह 06:00 बजे जमीन पर गिरा दिया था। इस समय, ओस (Dew) के कारण जमीन गीली होती है। यदि उसे जमीन पर गिराया गया होता, तो उसके कपड़ों पर निश्चित रूप से ओस के कारण गीलापन या घास-फूस का अंश चिपका होना चाहिए था, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं मिला।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने शुरू की प्रोफेशनल जांच
इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने बताया कि प्रार्थी (ड्राइवर) के बताए अनुसार पुलिस लूट की सभी संभावित एंगल पर पेशेवर तरीके से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की साइबर टीम सीसीटीवी को खंगाल रही है और कुछ पार्टियां झारखंड की ओर रवाना की गई हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी पुष्टि की कि ड्राइवर के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं, जिनका अध्ययन किया जा रहा है और ड्राइवर के संदेही होने के एंगल से भी विवेचना की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि अगर घटना घटित हुई है, तो लुटेरों को जल्द पकड़ा जाए और अगर कहानी मनगढंत है, तो सच्चाई सामने लाई जा सके।





