मैनपाट की मार्मिक तस्वीर: CAF जवान के बाद अब युवक का शव भी 5 किलोमीटर पैदल ढोया; ग्रामीणों का सवाल- कहाँ गुम हुईं सड़कें?

महेश यादव मैनपाट । मैनपाट के कमलेश्वरपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित असगवां सुगापानी गांव आज भी विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न होने के कारण इस दुर्गम रास्ते ने पिछले कुछ दिनों में मानवता को शर्मसार करने वाली दो हृदय विदारक तस्वीरें पेश की हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खोखले वादों की पोल खोल दी है।
कंधों पर सफर करती लाशें: दर्द का दोहराव
इस गांव की दुर्दशा का पहला दृश्य कुछ ही दिन पहले तब सामने आया, जब छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के जवान लवरेंश बड़ा का निधन हो गया। सड़क न होने के कारण, उनके पार्थिव शरीर को घर तक लाने के लिए कोई वाहन नहीं पहुँच सका। मजबूरी में, जवान के परिजनों और साथी ग्रामीणों को उनके शव को करीब 5 किलोमीटर तक अपने कंधों पर पैदल ढोना पड़ा।
यह दर्द अभी थमा भी नहीं था कि असगवां सुगापानी ने एक और त्रासदी झेली। गांव के युवक अमित किंडो की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। एक बार फिर, गांव की किस्मत नहीं बदली। प्रशासन की उदासीनता के चलते, अमित किंडो के शव को भी गाड़ी से घर तक लाना संभव नहीं हुआ। ग्रामीणों को मजबूरन एकजुट होकर शव को अपने कंधों का सहारा देना पड़ा और पैदल चलकर उसके घर तक पहुंचाया।
प्रशासन मौन, ग्रामीण आक्रोशित
दो-दो दर्दनाक घटनाओं के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि पूरी तरह से खामोश हैं। गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीण व्यवस्था पर सीधा सवाल उठा रहे हैं:
“क्या सड़क बनाने की फाइलें मैनपाट की पहाड़ियों में गुम हो गई हैं? जवान और युवक की लाश ने बता दिया है कि हमारे लिए सड़क सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित रह गई है। हमारी बेबसी अब हमारी जान पर भारी पड़ रही है।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस 7 किलोमीटर के दुर्गम रास्ते पर सड़क निर्माण का कार्य शुरू करे, ताकि किसी तीसरे परिवार को इस तरह का दर्द और बेबसी न झेलनी पड़े। पहाड़ों में दर्द की गूंज अब एक जन-आंदोलन का रूप लेने लगी है।




