ऑपरेशन सिंदूरः आतंकी ठिकाने पर मारे गए आतंकी या फिर पाक सैनिक! ताबूतों पर पाकिस्तानी झंडे, जनाजे में मौजूद पाकिस्तान सेना के बड़े अधिकारियों ने खोली पाकिस्तान की पोल

हिन्द शिखर न्यूज़ । ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त किए गए आतंकवादी ठिकाने पर मारे गए आतंकवादियों को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है इस ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादियों के ताबूत पाकिस्तानी राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे हुए थे। इतना ही नहीं, उनके अंतिम संस्कार (जनाजे) में पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक वर्दी पहने हुए उच्च ranking अधिकारी भी शामिल हुए। इस अभूतपूर्व घटना ने यह लगभग निर्विवाद रूप से स्थापित कर दिया है कि आतंकवादी ठिकाने पर मारे गए ये व्यक्ति वास्तव में पाकिस्तानी सेना के ही सदस्य थे, जो सीमा पार आतंकवाद को अंजाम देने के लिए इस क्षेत्र में सक्रिय थे।
ऑपरेशन सिंदूर, जो सीमावर्ती क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आतंकवादी ठिकाने पर भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया एक सफल अभियान था, में कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था। शुरुआती तौर पर इनकी पहचान को लेकर अटकलें थीं। लेकिन अब सामने आए ये चौंकाने वाले दृश्य पाकिस्तान के नापाक इरादों और आतंकवाद को उसकी सीधी शह का एक और ठोस प्रमाण पेश करते हैं। विभिन्न टीवी चैनलों में दिखाई जा रहे विजुअल के अनुसार, मारे गए आतंकवादियों के ताबूत जब उनके अंतिम संस्कार के लिए लाए गए, तो वे स्पष्ट रूप से पाकिस्तानी झंडों में लिपटे हुए थे। इसके अतिरिक्त, जनाजे में मौजूद पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल शोक व्यक्त किया, बल्कि इन आतंकवादियों को सैन्य सम्मान भी दिया। वर्दीधारी अधिकारियों की सार्वजनिक उपस्थिति और पाकिस्तानी झंडों में लिपटे ताबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मारे गए आतंकवादी किसी सामान्य आतंकी संगठन के सदस्य नहीं थे, बल्कि सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना से जुड़े हुए थे। माना जा रहा है कि यह ठिकाना पाकिस्तानी सेना द्वारा आतंकवादियों को प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
यह घटना पाकिस्तान द्वारा लगातार किए जा रहे सीमा पार आतंकवाद के समर्थन और उसमें सीधी भागीदारी का एक और स्पष्ट प्रमाण है। भारत सरकार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाना और पाकिस्तान से इस घृणित कृत्य पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जाना चाहिए ।
एक आतंकवादी ठिकाने पर पाकिस्तानी सैनिकों का मारा जाना और फिर उन्हें सैन्य सम्मान दिया जाना, पाकिस्तान के आतंकवाद को राजकीय नीति के तौर पर इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा सबूत है।





