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संसद के अंदर कोहराम मचाने वालों को बीजेपी सांसद के रेफरेंस से मिला था पास …जानिए कौन है वह भाजपा सांसद

लोकसभा की सुरक्षा मे चूक का मामला इस वक्त की सबसे बड़ी खबर है।संसद हमले की बरसी पर आज संसद के अंदर और बाहर हड़कंप मच गया गया. एक ओर लोकसभा के अंदर दो युवक दर्शक दीर्घा से कूदकर सांसदों की बेंच पर पहुंच गए और कलर गैस का छिड़काव कर दिया. वहीं दूसरी ओर संसद के बाहर एक युवक और एक महिला ने गैस का छिड़काव कर जमकर नारेबाजी की. इससे संसद परिसर के बाहर हड़कंप मच गया.

संसद के बाहर की घटना में दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है. इनके नाम नीलम और अनमोल शिंदे है. नीलम महिला है और उनकी उम्र 42 साल है वो हरियाणा के हिसार की रहने वाली है. दूसरे आरोपी का नाम अनमोल शिंदे है. अनमोल के पिता का नाम धनराज शिंदे है और महाराष्ट्र के लातूर का रहने वाला है. इसकी उम्र 25 साल है.

संसद के अंदर घुसपैठ के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया इनमें से एक का नाम सागर शर्मा है, दूसरे का नाम मनोरंजन है। रिपोर्ट के मुताबिक सागर शर्मा के पास संसद का विजिटर पास था जो मैसूर के बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा ने जारी किया था। 2001 के संसद हमले की 22वीं बरसी पर दोनों के सदन में घुसपैठ को काफी गंभीर माना जा रहा है। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि यह कौन लोग थे और किस मकसद से संसद के भीतर घुसे थे।

कौन हैं सांसद प्रताप सिम्हा?

इस पूरे मामले पर आश्चर्य जताते हुए कई संसद सदस्यों ने कहा कि सदन में प्रवेश करने से पांच लेवल की सुरक्षा से गुजरना पड़ता है और विजिटर गैलरी में संसद के अंदर जाने के लिए एक सांसद के कार्यालय से हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। जानकारी में सामने आया है कि इन चारों को प्रवेश पास बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा ने जारी किया था। प्रताप सिम्हा कर्नाटक के मैसूर से सांसद हैं और सूत्रों के मुताबिक चैंबर में कूदने वाले कम से कम एक शख्स का संबंध उनके निर्वाचन क्षेत्र से है। सांसद सिम्हा ने 2014-2019 में मैसूर निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी।

आज दोपहर करीब एक बजे मनोरंजन और सागर शर्मा विजिटर गैलरी से लोकसभा के में कूद गये। फुटेज में सागर को डेस्क के ऊपर से कूदते हुए और अध्यक्ष की कुर्सी की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया, जबकि मनोरंजन एक पीला धुआं फेंकता हुआ देखा जा सकता है। जो भी व्यक्ति संसद का दौरा करना चाहता है वह सबसे पहले अपने निर्वाचन क्षेत्र के सांसद के नाम पर अनुरोध करता है। आम तौर पर जिन सांसदों के नाम पर पास जारी किए जाते हैं उनकी भी कड़ी जांच होती है लेकिन आज जब यह हुआ तो कई गंभीर सवाल उठे कि आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हो सकती है?

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