लखनपुर

दर्जनों ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया सड़क पुल के आभाव और जर्जर सड़क के कारण गर्भवती महिलाओं स्कूली बच्चों व वृद्धों को होती है अत्यधिक परेशानी

लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पटकुरा के चीताघुटरी में 1 किलोमीटर सड़क काफी जर्जर है। ग्रामीणों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों के द्वारा 17 जनवरी दिन बुधवार को उक्त सड़क की मरम्मत करने का बीड़ा उठाया और ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क को चलने लायक बनाया।  ग्रामीणों ने सड़क पर मिट्टी मुरूम आदि डालकर मरम्मत की।सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों तथा नुकीले पत्थरों को मिट्टी मुरूम से भरकर आने-जाने लायक बनाया।2 दर्जन से अधिक गांव के ग्रामिणों को इसी सड़क से होकर प्रतिदिन अपने मुख्य ग्राम ब्लाक मुख्यालय, बाजार के लिए अवागमन करते हैं। साथ ही कासी डांड नाला में पुल नही होने से बरसात के दिनों में यह आश्रित ग्राम मुख्य ग्राम व ब्लॉक मुख्यालय से कट जाता है। सड़क निर्माण नहीं होने से लोगों का सड़क पर चलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि श्रमदान के माध्यम से सड़क को चलने लायक बनाया गया। चीता घुटरी के ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि कई बार ग्राम सरपंच सचिव को सड़क मरम्मत के लिए कहा गया परंतु उनके द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। ना ही सड़क का मरम्मत कार्य कराया गया। सड़क जर्जर होने से आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही काशीडांड नाला पर पुल नहीं होने तथा सड़क जर्जर होने में ग्रामीणों को आवागमन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नाला में पुल नहीं होने तथा सड़क जर्जर होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है तथा मरीजों को खाट पर लेकर नाला पार कर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों को स्कूल आने जाने तथा ग्रामीणों को शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन लेने आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्षेत्रीय विधायक सहित स्थानियो जनप्रतिनिधियो को कई बार सड़क व पुल के निर्माण के लिए कहां गया परंतु अब तक इस ओर किसी भी प्रकार का पहल शासन प्रशासन की ओर से नहीं किया गया। काशी डांड नाला में पुल नहीं होने तथा सड़क जर्जर होने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि जर्जर सड़क होने तथा नाला में पुल नही होने की वजह से गर्भवती महिलाओं,स्कूली बच्चों एवं वृद्ध को अत्यधिक परेशानी होती थी। इसलिए ग्रामीणों के द्वारा कासी डांड नाला से बाल रिकिम घर तक श्रमदान कर 1 किलोमिटर तक सड़क को चलने लायक बनाया गया। श्रमदान करने वालों में
निर्मल एक्का, मेघलाल बड़ा, देवसाय बड़ा,प्रेम साय एक्का, संतरी एक्का ,रंजित एक्का, प्लस राम बड़ा, धनी एक्का, प्रवीन कुजुर, झीमन एक्का, हीरा साय, हरी साय, राजू लकड़ा, अंजन एक्का, राजनाथ बड़ा, सतीश तिग्गा,धन साय लकडा, विजय कुजुर, अनिल एक्का, संजू तिर्की, भईया लाल तिर्की, भीम साय तिग्गा, कालम साय, अन्य सामिल रहे।

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