हजारों निर्दोष बच्चों, महिला-पुरुषो के लाशों और कई लाख महिलाओं की देह पर हुआ था हिंदुस्तान का विभाजन: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर याद किया जाएगा 14 अगस्त, पीएम मोदी ने कहा-लाखों बहनों-भाइयों को होना पड़ा था विस्थापित

देश की आजादी के एक दिन पहले पूरे देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए इस स्मृति दिवस पर विभाजन के दौरान मारे गए देशवासियों को नमन किया गया। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों को श्रद्धासुमन अर्पित कर याद किया।
देश की आजादी के समय अनुमानित आंकड़ों के अनुसार 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गए और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। 10 किलोमीटर लंबी लाइन में लाखों लोग देशों की सीमा को पार हुए उस पार गए या इस पार आए। महज 60 दिनों में एक स्थान पर सालों से रहने वाले को अपना घर बार, जमीन, दुकानें, जायदाद, संपत्ति, खेती किसानी छोडकर हिंदुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिंदुस्तान आना पड़ा। हालांकि विस्थापन का यह दौर आगे भी चलता रहा, जिनके आंकड़े उपरोक्त से कई गुना हो सकते हैं।
विभाजन की घोषणा होने के बाद अनुमानित रूप में 10 लाख लोग मारे गए थे हालंकि एक अनुमान के मुताबिक 20 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे। जबकि अनुमानित रूप में 75 हजार से 1 लाख महिलाओं का बलात्कार या हत्या के लिए अपहरण हुआ। भारत विभाजन के दौरान बंगाल, सिंध, हैदराबाद, कश्मीर और पंजाब में दंगे भड़क उठे।
हिंसा, भारी उपद्रव और अव्यवस्था के बीच पाकिस्तान से सिख और हिन्दू भारत की ओर भागे। बहुतों को ट्रेन मिली और बहुतों को बस मिली। कहते हैं कि पाकिस्तान की ओर से जो ट्रेन आई उसमें लाशें भरी हुई थी। पुरुष और बच्चों की संख्या ज्यादा थी। विभाजन का यह काला अध्याय आज भी इतिहास के चेहरे पर विस्थापित हुए, भगाए गए, मारे गए, भटक कर मौत को गले लगाने वाली मनुष्यता के खूने के छींटों से भरा है।
पिछले साल ही पीएम ने की थी घोषणा
पीएम मोदी ने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई, और त्रासदी के दौरान पीड़ित लोगों के लचीलेपन और धैर्य की सराहना की। उन्होंने पिछले साल घोषणा की थी कि लोगों के संघर्षों और बलिदानों की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
बीजेपी के सीनियर लीडर्स ने भी दी श्रद्धांजलि
‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी यहां जंतर मंतर पर एक मौन जुलूस का नेतृत्व किया। इसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अनुराग ठाकुर सहित पार्टी के कई नेता शामिल हुए। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उन लोगों को याद किया जिन्होंने विभाजन के दौरान असहनीय कीमत चुकाई थी। उन्होंने कहा कि हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि कैसे स्वार्थ और व्यक्तिगत हितों की राजनीति ने विभाजन और दर्द को जन्म दिया।
शाह बोले-इतिहास के अमानवीय अध्याय को नहीं भुलाया जा सकेगा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के इतिहास के अमानवीय अध्याय को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। यह इतिहास का सबसे स्याह पक्ष रहा। हमें आजादी तो मिली ने इसका देश ने काफी कीमत चुकाया है। अपनी श्रद्धांजलि में शाह ने कहा कि यह युवा पीढ़ी को देशवासियों द्वारा झेली गई यातना और दर्द की याद दिलाएगा और नागरिकों को हमेशा के लिए शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा। शाह ने कहा कि 1947 में देश का विभाजन भारतीय इतिहास का वह अमानवीय अध्याय है, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। हिंसा और घृणा ने लाखों लोगों की जान ले ली और असंख्य लोगों को विस्थापित किया। आज ‘विभाजन भयावह स्मरण दिवस’ पर मैं उन लाखों लोगों को नमन करता हूं, जिन्हें विभाजन का खामियाजा भुगतना पड़ा।
बंटवारे की रेखा लाखों औरतों के देह से गुजरी
1947 में भारत के बंटवारे का दंश सबसे ज्यादा महिलाओं ने झेला. अनुमान है कि इस दौरान 75 हजार से एक लाख महिलाओं का अपहरण हत्या और बलात्कार के लिए हुआ. जबरन शादी, गुलामी और जख्म ये सब बंटवारे में औरतों को हिस्से आया. आजादी से पूर्व हुए हिंसा ने धार्मिक हिंसा ने उग्र रूप धारण कर लिया था और महिलाओं को पुरुषों की लड़ाई में महिला होने की कीमत चुकानी पड़ी थी.





