आत्महत्या नहीं युवा आदिवासी किसान की हत्या हुई है, हत्या की दोषी जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार है , बगीचा तहसील प्रशासनिक राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप यह घटना हुई . पूर्व मंत्री ने कहा..अधिकारी कर्मचारी कबूतर की लड़ाई में व्यस्त रहे उधर….

मुकेश अग्रवाल पत्थलगांव । जशपुर जिले के ग्राम मुड़ी के 30 वर्षीय युवा आदिवासी किसान की आत्महत्या मामले में पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए इस घटना पर दुःख व्यक्त किया और कहा कि यह आत्महत्या नही है बल्कि हत्या है। इस युवा आदिवासी किसान की हत्या की दोषी जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार है। उन्होंने इसे लॉक डाउन अवधि में हुए प्रशासनिक अनियमितता का परिणाम बताया और कहा कि मूढ़ी ग्राम बगीचा तहसील के अंदर आता है और पिछले कई दिनों से बगीचा तहसील प्रशासनिक राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है जहां तहसील के सारे अधिकारी कर्मचारी कबूतर की लड़ाई में व्यस्त रहे और उधर गरीब आदिवासी किसान मरते रहे ।उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके द्वारा जानबूझकर नेताओं के दबाव में बगीचा तहसील की समस्याओं को नजर अंदाज किया उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए इतना तक कह दिया कि चूंकि बगीचा तहसील भारतीय जनता पार्टी का गढ़ है और उसमें भी पाठ क्षेत्र के लोगो के ह्रदय में बीजेपी के प्रति निष्ठा है इसलिए भी राज्य सरकार के निर्देश पर बगीचा तहसील को नजर अंदाज किया गया जिसका परिणाम गरीब युवा किसान की आत्महत्या है ।गणेश राम भगत ने बताया कि लॉक डाउन की अवधि में स्थानीय अधिकारियों के द्वारा गरीब किसानों को प्रताड़ित किया जाता रहा है और दलालों को फायदा पहुचाने के उद्देश्य से मनमाने ढंग से सब्जी विक्रय का नियम बनाया जिसमें किसानों की कोई राय तक नही ली गई और बड़े व्यपारियो के साथ मिलकर गरीब किसानो को उनके फसलों के विक्रय हेतु न तो कोई उचित व्यवस्था किया और न ही उन्हें फसल बेचने दिया गया जिसके कारण बेचारे गरीब किसान अपनी मेहनत से कमाए फसल को चोरी छिपे रात के 2 बजे तोड़कर 4बजे भोर में शहर में लाकर औने पौने दाम में बेचना पड़ता था जिसे गरीब किसान लगातार अवसाद की स्थिति में आ रहे हैं ।और इसी का परिणाम है युवा किसान ने आत्महत्या किया है ।इसका प्रमाण देते हुए उन्होंने बताया कि मै स्वयं किसान हूँ और काफी पैसा और मेहनत करके मैने टमाटर लौकी आदि की खेती की है लेकिन जब फसल को जशपुर लाकर बेचने का प्रयास किया तो खेती की लागत तक नही आई।उन्होंने जिला प्रशासन के द्वारा मृत किसान की आत्महत्या को घरेलू कलह कहकर डाइवर्ट करने की आलोचना करते हुए कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है ।इसकी गम्भीरता से जांच होनी चाहिए ।और भविष्य में कोई किसान आत्महत्या करने मजबूर न हो ऐसी व्यवस्था जिला प्रशासन को करनी चाहिए ।
*लॉक डाउन में युवा किसान फांसी के फंदे पर झूल गया, मिर्च की लगाई थी फसल, हर दिन जाता था पहरेदारी करने, आखिर क्या हुआ कि लौट कर नहीं आया, जिले में किसान लगातार कर रहे आत्महत्या, हर वर्ष बढ़ रही है संख्या……….*
पण्डरापाठ/जशपुर। बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुढ़ी के ग्राम बिजाघाट में शुक्रवार काे एक 30 वर्षीय किसान ने अपने मिर्ची के खेत के पास फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। मृतक का नाम मनबाेध पिता सुखराम उम्र 30 वर्ष बताया जा रहा है। मृतक के परिजनाें ने बताया की मृतक गुरूवार की सुबह मिर्ची खेत में पहेदारी के लिए निकला और रात तक घर वापस नही आया। वहीं दुसरे दिन सुबह जब परीजन युवक की तलाश में निकले ताे युवक मिर्ची के खेत के पास ही एक पेंड़ में फांसी के फांसी के फंदें में झूलता देखा गया। वहीं मामले में पण्ड्रापठ पुलिस ने बताया की मर्ग की सुचना मिलने पर पुलिस घटना स्थल पहुंच कर शव काे पेड़ से उतारा गया और पीएम के लिए भेज दिया गया है। वहीं फिलहाल माैत का कारण अभी अज्ञात बताया जा रहा है। लेकिन जसपुर जिले में हर वर्ष आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती हुई देखी जा रही है। हर वर्ष आत्महत्या के लगभग 100 मामले सामने आते हैं जिसमें अधिक से अधिक किसान वर्ग के मृतक शामिल है। आखिर किसान क्यों आत्महत्या कर रहे है जांच का विषय है। इस पर सरकार और स्थानीय प्रशासन को गंभीरता से लेते हुए कार्य योजना बनाकर कार्य करने की आवश्यकता है।





