छत्तीसगढ़

प्रदेश के हज़ारों शिक्षकों की पदोन्नति और TET की अनिवार्यता पर विधानसभा में जवाब देगी सरकार

रायपुर: छत्तीसगढ़ में वर्षों से पदोन्नति और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की कानूनी पेचीदगियों के बीच फंसे हजारों शिक्षकों के भविष्य का फैसला अब विधानसभा के पटल पर होगा। खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने आगामी सत्र के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री से सवाल पूछते हुए शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

विधायक यादव ने शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार से पूछा है कि प्रदेश में कुल कितने ऐसे शिक्षक हैं जिनके लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है? उन्होंने इसका जिलावार डेटा माँगा है। इसके साथ ही, उन्होंने यह गंभीर सवाल भी उठाया है कि क्या TET की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने माननीय न्यायालय के समक्ष अपना कोई पक्ष रखा है? यदि हाँ, तो सरकार द्वारा कोर्ट में दी गई उन दलीलों का विवरण क्या है, जिसके कारण शिक्षक पदोन्नति से वंचित हैं।

2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर स्पष्टता की मांग:

विधायक ने पूछा है कि चूंकि प्रदेश में TET की शुरुआत ही वर्ष 2011 में हुई थी, तो उससे पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए सरकार की क्या नीति है? क्या उन्हें नियमों में कोई शिथिलता (छूट) दी गई है या उनकी पदोन्नति के नियमों में कोई बदलाव किया गया है? इसके साथ ही उन्होंने एक सवाल यह भी किया है कि क्या शिक्षा विभाग के अलावा किसी अन्य सरकारी विभाग में भी नियुक्ति के बाद इस तरह की किसी योग्यता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है?

13 फरवरी तक माँगा जवाब, 25 को विधानसभा में चर्चा:

लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और SCERT को निर्देशित किया है कि वे 13 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से इन सवालों के जवाब संकलित कर भेजें। विधानसभा में इस प्रश्न पर उत्तर देने की तिथि 25 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। यह मामला प्रदेश के उन हजारों शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है टीईटी के अनिवार्यता की वजह से परेशान है . सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह शिक्षकों को राहत देने के पक्ष में है या नहीं।

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