जशपुर

सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘मुसीबत’ बनी ऑनलाइन हाजिरी, आधार बेस्ड सिस्टम ठीक कराने के चक्कर में नर्स का बैंक खाता हुआ साफ, साइबर सेल में शिकायत दर्ज..

जशपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू किया गया ‘आधार बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम’ (ABAS) अब उनकी मेहनत की कमाई के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है। जशपुर जिला अस्पताल में पदस्थ एक नर्सिंग स्टाफ विभा रानी वर्मा के साथ हुई ठगी की घटना ने इस सिस्टम की सुरक्षा और विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। अटेंडेंस की तकनीकी समस्या को सुधारने के चक्कर में हैकर्स ने बड़ी आसानी से नर्स का मोबाइल एक्सेस कर बैंक खाते को पूरी तरह खाली कर दिया।

​सिस्टम की खामी या साइबर जाल?

​पीड़िता के अनुसार, मोबाइल ऐप पर ‘आधार बेस्ड अटेंडेंस’ दर्ज न होने के कारण वह काफी समय से परेशान थीं। इसे सुधारने की प्रक्रिया के दौरान जब वह विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर और तकनीकी सहायकों के पास गईं, तो उनसे कई बार ओटीपी (OTP) साझा कराया गया। इसी तकनीकी उलझन के बीच हैकर्स ने उनके मोबाइल का नियंत्रण ले लिया।

​व्हाट्सऐप ग्रुप बना ठगी का गेटवे

​घटना की कड़ी विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़ी है। ऑफिस के ही एक बाबू के नंबर से ग्रुप में ‘PM Kisan’ के नाम से एक संदिग्ध APK फाइल भेजी गई थी। सरकारी काम के दबाव और विभागीय ग्रुप पर भरोसे के कारण नर्स ने उस फाइल को ओपन किया, जिसके बाद उनका फोन हैक कर लिया गया।

​सिम बंद हुआ और पीछे से लूट लिया बैंक खाता

​हैकर्स की चालाकी इतनी थी कि सुधार प्रक्रिया के दौरान ही पीड़िता का सिम कार्ड अचानक बंद हो गया। जब तक 5 फरवरी को नया सिम कार्ड चालू हुआ, तब तक 3 से 8 फरवरी के बीच अज्ञात अपराधियों ने उनके खाते से सारे पैसे निकाल लिए। 8 फरवरी को बैलेंस चेक करने पर पता चला कि डिजिटल हाजिरी की इस कवायद ने उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है।

​प्रशासनिक सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल

​इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। साइबर सेल फिलहाल मामले की जांच कर रही है, लेकिन कर्मचारियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ‘आधार बेस्ड अटेंडेंस’ और निजी मोबाइल पर सरकारी काम का दबाव उन्हें असुरक्षित बना रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि सरकारी सिस्टम में सुधार के दौरान ही कर्मचारी ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो इस डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

“कर्मचारियों का कहना है कि जब तक विभाग सुरक्षित डिवाइस प्रदान नहीं करता, तब तक निजी फोन पर ऐसी संवेदनशील प्रणालियों का उपयोग बंद होना चाहिए।”

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