NDRF ने घुनघुटा बांध में बाढ़ आपदा से बचाव का किया रिहर्सल; डूबते व्यक्ति को बचाने एवं सीपीआर देने की प्रक्रिया का हुआ प्रदर्शन

अंबिकापुर: घुनघुटा बांध में आम नागरिकों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एनडीआरएफ द्वारा एक दिवसीय मॉक ड्रिल अभ्यास का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष मॉक ड्रिल 03 वाहिनी एनडीआरएफ, मुण्डली (कटक, ओडिशा) के डिप्टी कमांडर पवन जोशी के मार्गदर्शन तथा सब-इंस्पेक्टर अभिजीत साहू के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस दौरान बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों का सजीव प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रथम अभ्यास के तहत अचानक जलस्तर बढ़ने से बांध क्षेत्र के समीप फंसे 10 नागरिकों को जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दो बोट की सहायता से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
मॉक ड्रिल के दूसरे दृश्य में एक नाव में सवार दो यात्रियों के आपसी विवाद के कारण नदी में गिरकर डूबने की स्थिति का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एनडीआरएफ की बोट तत्काल मौके पर पहुँची और जवानों ने डूबते व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की। इस प्रक्रिया के माध्यम से डूबते व्यक्ति को बचाने की वैज्ञानिक विधि तथा सीपीआर (CPR) देने का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। इसके उपरांत नदी में डूबे व्यक्ति की खोज के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों द्वारा सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। चौथे दृश्य में क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रही एक बोट के दुर्घटनाग्रस्त होने पर त्वरित राहत कार्य का अभ्यास किया गया।

इस आयोजन के दौरान एनडीआरएफ के जवानों ने ग्रामीणों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया। जवानों ने घरेलू उपयोग की वस्तुओं जैसे पानी के खाली पीपे, नारियल एवं प्लास्टिक की बोतलों से अस्थायी लाइफ जैकेट बनाने और आपदा के समय जान बचाने के देशी व कारगर उपायों की जानकारी दी। ग्रामीणों को सिखाया गया कि कैसे इन सामान्य वस्तुओं को बांधकर डूबने से बचा जा सकता है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को आपदा के प्रति इतना सक्षम बनाना है कि वे विषम परिस्थितियों में भी स्वयं और दूसरों की रक्षा कर सकें।
अपर कलेक्टर सुनील नायक ने बताया कि इस मॉक ड्रिल में ओडिशा से आई एनडीआरएफ टीम के साथ जिला प्रशासन, होमगार्ड, एनसीसी और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के आयोजनों से नागरिकों का आत्मविश्वास बढ़ता है और जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है। वहीं डिप्टी कमांडर पवन जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार विभिन्न जिलों में ऐसे अभ्यास आयोजित किए जाते हैं ताकि जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके और आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी मूल्यांकन हो सके।





