बलरामपुर: 6.75 करोड़ रुपये की अफीम खेती के मामले में बिहार और झारखंड से दो मुख्य सरगना गिरफ्तार

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ की बलरामपुर पुलिस ने मादक पदार्थों की अवैध खेती और तस्करी के खिलाफ अपनी ‘एंड टू एंड’ (End-to-End) विवेचना के तहत एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क पर नकेल कसते हुए अफीम की खेती के मामले में बिहार के गया और झारखंड के चतरा जिले से दो मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार किया है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें तकनीकी साक्ष्यों और अंतरराज्यीय समन्वय का विशेष योगदान रहा।
इस मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि बलरामपुर के कुसमी और कोरंधा थाना क्षेत्रों में अफीम की अवैध खेती से जुड़ी है। पुलिस, राजस्व प्रशासन और एफएसएल (FSL) की संयुक्त टीमों ने पूर्व में दबिश देकर भारी मात्रा में अफीम की फसल जब्त की थी। ग्राम त्रिपुरी (कुसमी) से 4344.569 किलोग्राम अफीम बरामद की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.75 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वहीं, ग्राम तुरीपानी खजूरी (कोरंधा) से 1883.76 किलोग्राम अफीम जब्त हुई, जिसकी बाजार में कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है। कुल मिलाकर 6.75 करोड़ रुपये की नशीली फसल के इस अवैध कारोबार में अब तक कुल 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जिनमें से 9 सहयोगियों की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी थी।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (IG) सरगुजा रेंज और पुलिस अधीक्षक (SP) बलरामपुर स्वयं इस प्रकरण की सघन मॉनिटरिंग कर रहे थे। पुलिस ने विवेचना के दौरान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहकर तकनीकी साक्ष्यों (Technical Evidence) का सहारा लिया और आरोपियों के ठिकानों की सटीक पहचान की। बलरामपुर पुलिस की विशेष टीमों ने झारखंड और बिहार के कई जिलों में लगातार छापेमारी की और अंततः उन मुख्य सूत्रधारों को पकड़ने में कामयाबी पाई, जो दूर बैठकर इस अवैध खेती का वित्तपोषण और संचालन कर रहे थे।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में पैरू सिंह भोक्ता (35 वर्ष), निवासी सोमिया, जिला गया (बिहार) शामिल है, जो थाना कुसमी के अपराध क्रमांक 26/2026 का मुख्य सरगना है। दूसरा आरोपी भूपेन्द्र उरांव (38 वर्ष), निवासी ग्राम चाया, जिला चतरा (झारखंड) है, जो थाना कोरंधा के अपराध क्रमांक 04/2026 का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इन दोनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए जांच अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।





