अम्बिकापुर

मैनपाट महोत्सव 2026: गायक एवं सांसद मनोज तिवारी के ‘ओ राजा जी ऐकरे त रहल हो जरूरत’ और ‘रिंकिया के पापा’ की धुनों पर झूमा छत्तीसगढ़ का शिमला; सुनील सोनी और स्वप्नील जायसवाल ने भी बिखेरा जलवा

​अम्बिकापुर/मैनपाट, 14 फरवरी 2026 | छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में विख्यात पर्यटन स्थल मैनपाट के रोपाखार जलाशय के समीप आयोजित तीन दिवसीय ‘मैनपाट महोत्सव 2026’ का सांस्कृतिक आगाज़ ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 13 फरवरी को किए गए औपचारिक उद्घाटन के बाद, शनिवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुरों और थिरकन का ऐसा संगम हुआ कि कड़कड़ाती ठंड में भी दर्शकों का उत्साह चरम पर रहा। प्रकृति और संस्कृति के इस महोत्सव में स्थानीय कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय फलक के दिग्गजों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
​महोत्सव के मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध भोजपुरी गायक और सांसद मनोज तिवारी रहे। उन्होंने मंच संभालते ही अपने सदाबहार और लोकप्रिय गीतों की झड़ी लगा दी। जैसे ही उन्होंने “ओ राजा जी ऐकरे त रहल हो जरूरत महूरत खूबसूरत हो” और “रिंकिया के पापा” गाना शुरू किया, पूरा पंडाल झूम उठा। तिवारी ने अपने गीतों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा जिले को दी गई 500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास कार्यों की सौगातों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने “छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट सज रहा है” गीत के माध्यम से विकास की सराहना की और “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया हमको आज लग रहा है” कहकर स्थानीय जनता का दिल जीत लिया।
​छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की दुनिया के दिग्गज गायक सुनील सोनी ने महोत्सव में चार चाँद लगा दिए। उनकी जादुई आवाज़ और पारंपरिक धुनों ने दर्शकों को अपनी माटी की खुशबू से सराबोर कर दिया। विशेषकर उनके लोकप्रिय गीत “मोर छाइयां भुइयां” पर हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक अपनी जगहों पर खड़े होकर झूमने लगे। वहीं, सरगुजा संभाग के गौरव और मुंबई की संगीत दुनिया में अपनी पहचान बना चुके स्वप्नील जायसवाल ने अपनी दमदार गायकी से महफिल लूट ली। स्थानीय कलाकार के रूप में उनकी प्रस्तुति ने साबित किया कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रही हैं।
​मंच पर शास्त्रीय और लोक नृत्यों का भी अद्भुत समन्वय देखने को मिला। विधि सेन गुप्ता ने ‘ओडिसी’ नृत्य के माध्यम से भारतीय परंपरा की भव्यता को जीवंत किया, तो वहीं आनंदिता तिवारी और रित्विका बनर्जी ने ‘कथक’ की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आंचल पांडे द्वारा प्रस्तुत ‘शिव तांडव’ और ऊर्जा से भरपूर ‘छऊ नृत्य’ ने पूरे वातावरण को भक्ति और रोमांच से भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘रिदम व्हिसल रॉक बैंड’ के धमाकेदार प्रदर्शन से हुई, जिसने युवाओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
​इनके साथ ही गायक आयुष नामदेव, अमित दास, संतोष जायसवाल और अश्विका दास ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से शाम को और भी यादगार बना दिया। भोजपुरी गायिका शीतल यादव ने लोक संस्कृति की मिठास घोली। मैनपाट महोत्सव का यह सफल आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य भी कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह आयोजन सरगुजा की नई पहचान बनकर उभरा है।

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